धर्म-अध्यात्म

Ganesh Visarjan 2025: अनंत चतुर्दशी पर बप्पा का विसर्जन करते समय न करें ये छोटी-छोटी गलतियां

Sarita
3 Sept 2025 10:18 AM IST
Ganesh Visarjan 2025:  अनंत चतुर्दशी पर बप्पा का विसर्जन करते समय न करें ये छोटी-छोटी गलतियां
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Ganesh Visarjan 2025 : पंचांग के अनुसार, इस बार अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन, भक्त दस दिनों तक अपने घरों में विराजमान गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन करते हैं। भगवान गणेश को विदाई देने का यह एक भावुक क्षण होता है, लेकिन इस विदाई को सही तरीके से करना भी बेहद ज़रूरी है। विसर्जन के दौरान कुछ छोटी-छोटी गलतियों से बचना चाहिए, ताकि यह शुभ कार्य पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न हो सके।
विसर्जन के दौरान न करें ये गलतियाँ:
जलाशय को गंदा न करें:
गणपति की मूर्तियों को सीधे नदियों या तालाबों में विसर्जित न करें। आजकल पर्यावरण की रक्षा के लिए कृत्रिम कुंडों या घर पर ही विसर्जन की परंपरा अपनाई जाती है। इससे जल प्रदूषण नहीं होता।
अखंडित मूर्ति: विसर्जन से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मूर्ति खंडित न हो। खंडित मूर्ति का विसर्जन अशुभ माना जाता है।
अधूरे अनुष्ठान: विसर्जन से पहले पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती और पूजा करें। उन्हें मोदक, लड्डू और फूल अर्पित करें। अधूरे अनुष्ठानों के साथ मूर्ति का विसर्जन करना उचित नहीं है।
मूर्ति को सीधे जल में न डालें: मूर्ति को सीधे जल में फेंकने या डालने के बजाय, उसे धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक जल में प्रवाहित करें। ऐसा करने से यह एक सम्मानजनक विदाई होगी।
मादक पदार्थों का सेवन करने के बाद विसर्जन: विसर्जन के दिन मादक पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इस दिन पूर्णतः सात्विक रहना चाहिए और शुद्ध मन से भगवान को विदाई देनी चाहिए।
भोग और पूजा सामग्री इधर-उधर न फेंकें: फूल, माला, वस्त्र, नारियल या मिठाई जैसी चीज़ें जल में न फेंकें। इन्हें किसी स्वच्छ स्थान पर या किसी पवित्र वृक्ष की जड़ में रखें।
विसर्जन के बाद पीछे मुड़कर न देखें: ऐसा माना जाता है कि विसर्जन के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। अगले वर्ष पुनः आने का वचन देकर ही भगवान को विदाई दें।
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का समापन होता है। इस दिन किया जाने वाला विसर्जन केवल एक मूर्ति का विसर्जन नहीं है, बल्कि हमारे सभी दुखों और परेशानियों को ईश्वर के साथ विसर्जित करने का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए यह विदाई पूरी श्रद्धा, सम्मान और उचित रीति-रिवाजों के साथ की जाती है, ताकि अगले वर्ष बप्पा फिर से हमारे घर आ सकें।
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