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धर्म-अध्यात्म
Ekadashi: एकादशी व्रत के दौरान क्या चाय या कॉफी पी सकते हैं, जानें व्रत में खाने-पीने के नियम
Sarita
4 Jan 2026 6:40 AM IST

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Ekadashi: लाखों लोग एकादशी का व्रत रखते हैं। इस व्रत को रखने के कई फायदे हैं। यह व्रत हमारी शारीरिक शक्ति के साथ ही इच्छा शक्ति को भी बढ़ाता है। यदि आप भी एकादशी का व्रत रखते हैं तो जानिए कि आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। क्या पीना चाहिए और क्या नहीं।
एकादशी के व्रत में क्या खा या पी सकते हैं?
1. निर्जला व्रत: वैसे तो कई भक्तगण एकादशी के दिन जल भी नहीं लेते हैं। पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर देते हैं। अगले दिन पारण के समय ही वह अन्न जल ग्रहण करते हैं। यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं तो कम से कम जल ग्रहण कर सकते हैं।
2. जलाहर: इसका अर्थ है कि मात्र जल को ही आहार मानकर एकादशी का व्रत रखना। दिन और रात में कितनी ही बार जल ग्रहण करके एकादशी का व्रत रख सकते हैं। लेकिन कई भक्तगण अपनी शारीरिक स्थिति के कारण यह नहीं कर पाते हैं तो वह क्षीरभोज करते हैं।
3. क्षीरभोजी: क्षीर का अर्थ दूध और भोजी का अर्थ भोजन। अर्थात एकादशी के समय दुग्धाहार ले सकते हैं। दूध में गाय का दूध ही ले सकते हैं भैंस या बकरी का नहीं। इसे दुग्धाहारी या पयोहारी भी कहते हैं।
4. रसभोजी: अर्थात फलों के रसों का ही सेवन करना। फलों में अंगूर, अनार, पपीता, केला, सेवफल, मौसंबी, संतरा, अनन्नास, नारियल पानी आदि।
5. फलाहार: इसका अर्थ है फलों का आहार के रूप में लेना। इसमें भी खास फलों का ही चयन किया जाता है। जैसे केला, पपीता, सेवफल, अंगूर, मौसंबी, संतरा आदि। फलाहार में सूखे मेवे भी ले सकते हैं, जैसे बादाम, पिस्ता और अखरोट आदि।
6. नक्तभोजी: नक्त का अर्थ रात और भोजी का अर्थ भोजन करने वाला। अर्थात केवल रात में भोजन करने वाला। इस नियम में सूर्यास्त के बाद भोजन कर सकते हैं। कुछ लोग एक समय फलाहार और रात में भोजन कर लेते हैं। हालांकि रात्रि के भोजन में भी उपवास की वस्तुओं का ही सेवन करते हैं। जैसे साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़ा, शकरकंदी, आलू, मूंगफली के दाने, कुट्टू का आटा एवं सामक चावल आदि।
ऐसे व्रत और उपवास होते हैं जिनमें व्यक्ति दिन भर निराहार (बिना भोजन के) रहता है और केवल रात में (सूर्यास्त के बाद) एक बार भोजन करता है। ऐसे व्रत को 'नक्त व्रत' और उसे करने वाले को 'नक्तभोजी' कहा जाता है।
एकादशी के व्रत में क्या खा या पी नहीं सकते हैं?
1. कॉफी: कॉफी बीन्स कहवा नाम के फल के बीज हैं। व्रत में बीज खाना या उसका रस पीना वर्जित माना गया है। कहवा एक प्रकार की फली है तथा उपवास में सभी प्रकार की फलियों का सेवन वर्जित होता है। कोको पाउडर भी वही है।
2. चाय: चाय एक पौधे की सूखी पत्तियां होती हैं तथा सामान्यतः इसे एक झाड़ी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। जिस तरह हम व्रत में पालक, मेथी जैसी अन्य पत्तियां नहीं खा सकते या उसका रस नहीं पी सकते उसी तरह चाय भी वर्जित मानी जाना चाहिए।
3. च्यवनप्राश: च्यवनप्राश 40 से अधिक सामग्रियों द्वारा बनाया जाता है, अतः कोई न कोई सामग्री एकादशी व्रत के दौरान वर्जित मानी जाने वाली सामग्री इसमें मिली हुई हो सकती है।
4. पनीर: पनीर, दुग्ध का एक विकृत रूप है। भले ही यह गाय के दूध से बना हो परंतु एकादशी के व्रत में इसका सेवन नहीं कर सकते हैं।
5. मटर: हरी मटर एक प्रकार की फलियां हैं तथा एकादशी व्रत के दौरान इनका सेवन वर्जित है।
6. टमाटर: टमाटर को कुछ लोग फल मानते हैं लेकिन इसका सेवन भी वर्जित ही माना गया है।
7. शरबत: रूह अफ़ज़ा जैसे अन्य तरह के सभी शरबत एकादशी में वर्जित माने गए हैं।
8. ड्रिंक: किसी भी प्रकार का ड्रिंक, बीयर, शराब आदि का सेवन भी वर्जित है।
9. सब्जी: एकादशी के दिन व्रत धारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
10. अन्य पदार्थ: चॉकलेट, जौ, बैंगन, सेम फली, टॉफी, मशरूम, फ्रेंच फ्राइज, क्रिस्पी कॉर्न आदि पदार्थ का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
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