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धर्म-अध्यात्म
प्रदोष व्रत पर करें ये 3 उपाय, मिलेगी शिवजी की कृपा
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 7:23 PM IST

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Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार नवंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में सुख और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। चूंकि 6 नवंबर की शाम प्रदोष काल के दौरान त्रयोदशी तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत में पूजा का विशेष महत्व सूर्यास्त के आसपास के समय को दिया जाता है। इसे प्रदोष काल कहा जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में 6 नवंबर को प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना शुभ माना गया है। हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त के समय के अनुसार प्रदोष काल में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से वैवाहिक सुख, पारिवारिक शांति और समृद्धि की कामना से किया जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति और परिवार के कल्याण की कामना करते हुए व्रत रखते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल की सफाई करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि घर में शिवलिंग है, तो उसकी विधिपूर्वक पूजा भी की जा सकती है।
इसके बाद श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दिनभर व्रत रखते हैं। कुछ भक्त फलाहार करते हैं, जबकि कुछ केवल जल ग्रहण कर उपवास रखते हैं। हालांकि व्रत रखने का तरीका अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार चुनना चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को कठोर उपवास करने से बचना चाहिए।
प्रदोष काल शुरू होने से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लें। इसमें जल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीपक, फल और मिठाई रख सकते हैं। शाम के समय भगवान शिव का जल से अभिषेक करें। परंपरा के अनुसार दूध से अभिषेक भी किया जाता है। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र और फूल अर्पित करें। भगवान शिव को चंदन लगाएं और धूप-दीप दिखाएं।
पूजा के दौरान भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार 11, 21 या 108 बार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की आरती करें।
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत की पूजा में बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व होता है। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। पूजा के समय साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दौरान भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना कर सकते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए धार्मिक परंपराओं में कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं। पहला उपाय शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने से जुड़ा है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। जल अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना विशेष शुभ माना जाता है।
दूसरा उपाय भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करना है। मान्यता के अनुसार, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और परिवार में प्रेम बनाए रखने की कामना से शिव-पार्वती की आराधना की जाती है। इस दौरान माता पार्वती को फूल और प्रसाद अर्पित कर परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जा सकती है।
तीसरा उपाय जरूरतमंद लोगों को दान देना है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता भी कर सकते हैं।
प्रदोष व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने और मन को शांत रखने की परंपरा है। इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। भगवान शिव की आराधना करते समय श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
शुक्र प्रदोष व्रत का संबंध भगवान शिव की कृपा के साथ शुक्रवार की धार्मिक मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। शुक्रवार को माता लक्ष्मी की आराधना का दिन भी माना जाता है। इसी कारण कई श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ परिवार की आर्थिक उन्नति की कामना भी करते हैं।
प्रदोष व्रत का पारण स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है। कुछ श्रद्धालु शाम की पूजा के बाद भोजन ग्रहण करते हैं, जबकि कुछ अगले दिन व्रत खोलते हैं। इसलिए पारण के लिए अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पंचांग का पालन करना उचित है।
इस बार 6 नवंबर को पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष धार्मिक अवसर है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है। श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना के साथ व्रत रख सकते हैं।
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