धर्म-अध्यात्म

Dhundhiraj Chaturthi: ढुण्ढिराज चतुर्थी पर आज पढ़ें ये व्रत कथा

Sarita
21 Feb 2026 10:56 AM IST
Dhundhiraj Chaturthi:  ढुण्ढिराज चतुर्थी पर आज पढ़ें ये व्रत कथा
x
Dhundhiraj Chaturthi: हर महीने की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करते हैं. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी कहा जाता है. इस बार यह व्रत 21 फरवरी, शनिवार को रखा जा रहा है. इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ गया है. मान्यता है कि इस व्रत की कथा सुने बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता|
ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत कथा:
पुराणों के अनुसार, एक समय भगवान शिव ने काशी को अपना निवास स्थान बनाने का विचार किया. उस समय काशी पर राजा दिवोदास का शासन था. राजा दिवोदास बहुत धर्मात्मा, दयालु और न्यायप्रिय थे. उनके राज्य में किसी भी चीज की कमी नहीं थी|
राजा दिवोदास को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि जब तक उनके राज्य में सब कुछ ठीक रहेगा और कोई कमी नहीं होगी, तब तक कोई भी देवता काशी में प्रवेश नहीं कर सकेगा|
भगवान शिव को काशी बहुत प्रिय थी, इसलिए उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को वहां भेजने का निश्चय किया. गणेश जी ने काशी जाने से पहले एक ज्योतिषी का रूप धारण किया और अपना नाम ‘ढुण्ढि’ रखा|
काशी पहुंचकर उन्होंने अपनी बुद्धि और ज्ञान से लोगों को प्रभावित किया. धीरे-धीरे उनकी ख्याति पूरे नगर में फैल गई. लोगों का ध्यान राजा दिवोदास से हटकर ढुण्ढि की ओर जाने लगा. इससे राजा के शासन में कमी आने लगी|
जब राज्य की स्थिति पहले जैसी नहीं रही, तब ब्रह्मा जी का वरदान प्रभावहीन हो गया और भगवान शिव को काशी में प्रवेश मिल गया. शिव जी ने गणेश जी की बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर उन्हें ‘ढुण्ढिराज’ नाम दिया. उन्होंने कहा कि जो भी भक्त काशी आएगा, उसकी यात्रा ढुण्ढिराज गणेश की पूजा के बाद ही पूरी मानी जाएगी|
कहा जाता है कि जिस दिन शिव जी ने गणेश जी को ढुण्ढिराज नाम दिया, वह फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी का दिन था. तभी से इस तिथि को ढुण्ढिराज चतुर्थी के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हो गई. श्रद्धा से व्रत और कथा सुनने से भक्तों को सुख और सफलता मिलती है|
Next Story