धर्म-अध्यात्म

Devuthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी के दिन भूल से भी न करें ये काम, वर्ना जाएंगी परेशानियां

Sarita
28 Oct 2025 8:38 AM IST
Devuthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी के दिन भूल से भी न करें ये काम, वर्ना  जाएंगी परेशानियां
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Devuthani Ekadashi 2025: पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी व्रत 2025 में 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और चतुर्मास का अंत होता है। यह शुभ तिथि विवाह, मुंडन और गृहप्रवेश जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि भूल से भी ये कार्य करने से जीवन में कई परेशानियाँ आती हैं। आइए जानें कि देवउठनी एकादशी पर आपको किन कार्यों से बचना चाहिए।
देवउठनी एकादशी पर ये काम न करें
चावल का त्याग करें: एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति अगले जन्म में कीड़े के रूप में जन्म लेता है। इसलिए व्रती और परिवार के अन्य सदस्यों को इस दिन चावल का त्याग करना चाहिए।
तुलसी के पत्ते न तोड़ें: देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह होता है। तुलसी माता भगवान विष्णु को प्रिय हैं और वे स्वयं इस दिन व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। भोग लगाने के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लेने चाहिए।
तामसिक भोजन और शराब का त्याग करें: एकादशी को पूर्णतः सात्विक माना जाता है। इस दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन या अन्य तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
दिन में न सोएं: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन दिन में सोना वर्जित है। जो लोग व्रत नहीं कर रहे हैं, उन्हें भी इस दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर भजन-कीर्तन और जागरण करना शुभ माना जाता है।
वाद-विवाद और अपशब्दों से बचें: देवउठनी एकादशी के पावन दिन किसी से भी झगड़ा या बहस करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, किसी के प्रति अपशब्दों या कटु शब्दों का प्रयोग करने से भी बचना चाहिए। नकारात्मक विचारों से भी बचें। ऐसा करने से व्रत का फल नष्ट हो सकता है और जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।
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