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धर्म-अध्यात्म
Darsha Amavasya 2025: कब है दर्श अमावस्या, जानें सही तिथि और पूजा के नियम
Sarita
15 Jun 2025 10:22 AM IST

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Darsha Amavasya 2025: दर्श अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है. प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या होती है. इसे ‘दर्श अमावस्या’ या उस माह की अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस दिन को विशेष रूप से पितरों (पूर्वजों) की शांति, तर्पण और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन पितृ अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं. यह दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने और पितरों को संतुष्ट करने के लिए उत्तम है. इस दिन तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है
पंचांग क अनुसार, आषाढ़ माह की दर्श अमावस्या तिथि 24 जून दिन बुधवार को शाम 6:59 बजे शुरू होगी और 26 जून दिन गुरुवार को शाम 4:00 बजे खत्म होगी. उदयातिथि के अनुसार, आषाढ़ माह की दर्श अमावस्या का मुख्य पर्व और पूजा 25 जून बुधवार को ही की जाएगी|
दर्श अमावस्या पूजा के नियम:
दर्श अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा) में स्नान करें.
यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
स्नान के बाद सूर्य देव को जल में लाल चंदन, अक्षत और फूल मिलाकर अर्घ्य दें.
हाथ में जल, काले तिल, जौ और थोड़ा कुशा (घास) लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करें.
अपने गोत्र का नाम लेकर और पितरों का स्मरण करते हुए धीरे-धीरे जल को पितृ तीर्थ (अंगूठे और तर्जनी के बीच का भाग) से नीचे गिराएं. यह क्रिया कम से कम तीन बार करें.
तर्पण करते समय पितृ गायत्री मंत्र या अन्य पितृ मंत्रों का जाप कर सकते हैं.
इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें पितरों का वास माना जाता है.
पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं, कच्चा दूध अर्पित करें और उसकी सात बार परिक्रमा करें.
शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाए|
देवताओं की करें पूजा:
घर के पूजा स्थान को साफ करें. भगवान विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करें.
दीपक जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें.
भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन आदि अर्पित करें.
मां लक्ष्मी और तुलसी माता की भी पूजा करें. तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं.
अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीब, जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अन्न (गेहूं, चावल, दाल), वस्त्र, तिल, गुड़, घी, या मिठाई का दान करें.
काले तिल का दान पितृ दोष निवारण के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है. गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यकारी होता है|
जानें क्या है मान्यता:
दर्श अमावस्या पर चंद्र देव की पूजा का विधान है. हालांकि इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, लेकिन उनके अप्रत्यक्ष स्वरूप की पूजा की जाती है ताकि मन को शांति और स्थिरता मिल सके. इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है. गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, तिल आदि का दान करना शुभ माना जाता है. अमावस्या की रात को नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं, इसलिए इस दिन पूजा-पाठ और दान करने से नकारात्मकता का नाश होता है. जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उनके लिए अमावस्या के दिन विशेष पूजा और उपाय करने से इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है|
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