धर्म-अध्यात्म

Chhath Puja 2025: छठ पूजा में पढ़ें ये 4 मंत्र, सूर्य देव करेंगे हर इच्छा पूरी

Sarita
26 Oct 2025 8:41 AM IST
Chhath Puja 2025: छठ पूजा में पढ़ें ये 4 मंत्र, सूर्य देव करेंगे हर इच्छा पूरी
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Chhath Puja 2025: छठ पूजा लोक आस्था और श्रद्धा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व चार दिनों तक पूरी निष्ठा, अनुशासन और शुद्धता के साथ मनाया जाता है। व्रती इस दौरान अपने मन, शरीर और आत्मा को पूरी तरह पवित्र रखकर छठी मैया की आराधना करते हैं। छठ महापर्व में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, आरोग्य और समृद्धि का स्रोत माना जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 25 अक्तूबर 2025 को नहाय-खाय के साथ शुरू हो चुका है और 28 अक्तूबर 2025 को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ संपन्न होगा।अर्घ्य अर्पण के समय श्रद्धालु विशेष मंत्रों का जाप करते हैं। इन मंत्रों के माध्यम से वे सूर्य देव से अपने और परिवार के जीवन में सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि अनुशासन, समर्पण और पवित्रता का संदेश भी देता है।
सूर्य देव के विशेष मंत्र और उनका महत्व:
छठ पूजा के दौरान सूर्य देव की उपासना के समय विशेष मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इन मंत्रों से न केवल शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि स्वास्थ्य, सौभाग्य और सफलता भी प्राप्त होती है।
सूर्य बीज मंत्र:
इस मंत्र का जाप करने से मन और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
मंत्र: ॐ ह्रीं सूर्याय नमः
आदित्य हृदयम मंत्र:
इस मंत्र से व्यक्ति का भाग्य चमकता है और रुके हुए कार्य पूरे होते हैं।
मंत्र: नमस्कारं च देवेशं लोकनाथं जगतां पतिं।
सूर्यमस्तकं बध्यं ब्राह्मणं बद्धमाश्रयेत॥
सूर्य सिद्धि मंत्र:
इस मंत्र के जाप से जीवन में सौभाग्य बढ़ता है और मन में शांति बनी रहती है।
मंत्र: ॐ सूर्याय सुर्याय नमः
सूर्य प्रार्थना मंत्र:
इस मंत्र से ग्रहों के दोष दूर होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
मंत्र:
ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।
विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि॥
अन्य प्रभावशाली सूर्य मंत्र:
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
ॐ सूर्याय नमः
ॐ घृणि सूर्याय नमः
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