धर्म-अध्यात्म

Chhath Puja 2025: बच्चों पर छठी मैया का रहेगा आशीर्वाद, छठ पूजा व्रत कथा पढ़कर साधना पूर्ण करें

Sarita
21 Oct 2025 12:20 PM IST
Chhath Puja 2025: बच्चों पर छठी मैया का रहेगा आशीर्वाद, छठ पूजा व्रत कथा पढ़कर साधना पूर्ण करें
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Chhath Puja 2025: छठ पूजा लोक आस्था का महापर् है जिसमें छठी मइया यानी षष्ठी देवी की विशेष पूजा की जाती है. इस त्योहार पर डूबते और उगते सूर्य की पूजा कर अर्घ्य दिया जाता है. पंचांग के अनुसार, हर साल छठ पूजा नहायखाय के साथ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि से शुरू हो जाती है और सुबह के अर्घ्य के साथ सप्तमी तिथि पर तिथि का समापन होता है. इस साल छठ पूजा 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 28 अक्टूबर को संपन्न होगी. छठ पूजा की शाम के समय व्रती महिलाएं व्रत कथा सुनती सुनाती है. छठ कथा सुनने सुनाने से संतान के जीवन में समस्याएं हीं आती हैं. व्रत कथा के बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है. ऐसे में आइए इस कड़ी में जानें छठ पूजा की कथा|
छठ पूजा व्रत कथा :
छठ पूजा की पौराणिक कथा है कि एक समय राजा प्रियव्रत हुआ करते थे जिन्हें कोई संतान नहीं थी जिससे वो और उनकी पत्नी मालिनी हमेशा दुखी रहती थीं.संतान प्राप्ति के लिए कई जतन किए लेकिन निराशा ही हाथ लगीं. एक बार की बात है जब संतान प्राप्ति की कामना के साथ राजा और रानी ने महर्षि कश्यप के पास जाकर संतान प्राप्ति के लिए कोई अचूक उपाय बताने का आग्रह किया. महर्षि कश्यप ने राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी की संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ति के लिए यज्ञ का आयोजन किया. महर्षि कश्यप ने यज्ञ आहुति खीर बनवाई और आहूति के बाद बची खीर को प्रियव्रत की पत्नी मालिनी को खाने के प्रसाद के रूप में दिया|
खीर के प्रभाव से रानी गर्भवती हो गई लेकिन 9 महीने बाद रानी ने एक मृत पुत्र को जन्म दिया. ऐसी स्थिति में राजा रानी और अधिक दुखी हो गए. अंत में अपने मृत पुत्र को लेकर राजा प्रियव्रत श्मशान गए और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने का निर्णय लिया. जैसे ही राजा ने प्राण देने की ठानीं वैसे ही श्मशान में एक देवी प्रकट हो गई और राजा प्रियव्रत से कहा मैं हे राज मैं ब्रह्मा की पुत्री देवसेना हूं. मैं सृजन सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से हुआ है जिसके कारण ही मैं षष्ठी कहलाती हूं. देवी ने आगे पूछा कि तुम क्यों अपने प्राण त्यागने का प्रयास कर रहे हो.तब राजा ने अपनी स्थिति के बारे में देवी को सबकुछ बताया|
इस पर षष्ठी देवी ने राजा प्रियव्रत को उनकी समस्या का समाधान बताते हुए कहा कि तुम मेरी विधि विधान से पूजा करो और दूसरों को भी मेरी पूजा के लिए प्रेरित करो. इससे तुम्हें संतान सुख की अवश्य प्राप्ति होगी. राजा ने देवी के कहने पर कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि पर व्रत रखा और षष्ठी माता की विधि-विधान से पूजा अर्चना की और अपने आसपास के लोगों को भी छठी माता का व्रत रखने के लिए प्रेरित किया.षष्ठी देवी की पूजा के फलस्वरूप राजा की पत्नी फिर गर्भवती हुईं और 9 महीने बाद उनको पुत्र रत्न की प्राप् हुई. इस तरह हर कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि पर छठी मइया की आराधना की जाती है और व्रत का संकल्प ती जाती है|
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