धर्म-अध्यात्म

Bada Mangal 2025: क्या है बड़ा मंगल, जानिए इसका ऐतिहासिक महत्व और तिथि

Sarita
3 May 2025 12:34 PM IST
Bada Mangal 2025: क्या है बड़ा मंगल,  जानिए इसका ऐतिहासिक महत्व और तिथि
x
Bada Mangal 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने के सभी मंगलवार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस दौरान विशेष रूप से भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इन दिनों हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की आराधना की जाती है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्य क्षेत्रों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इन दिनों श्रद्धालु मंदिरों में विशेष पूजा करते हैं, भंडारे आयोजित करते हैं और प्रसाद वितरित किया जाता है।
बड़ा मंगल की तिथियां :
इस वर्ष बड़ा मंगल की पूजा पांच मंगलवारों को की जाएगी।
पहला बुढ़वा मंगल – 13 मई 2025
दूसरा बुढ़वा मंगल – 20 मई 2025
तीसरा बुढ़वा मंगल – 27 मई 2025
चौथा बुढ़वा मंगल – 2 जून 2025
पांचवां बुढ़वा मंगल – 10 जून 2025
धार्मिक महत्व:
हनुमान जी को भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्त के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना करने से व्यक्ति को बुरी शक्तियों, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु से रक्षा मिलती है। ज्योतिष के अनुसार उनकी पूजा से मंगल और शनि ग्रह के दुष्प्रभाव भी कम होते हैं। ऐसा माना जाता है कि बुढ़वा मंगल पर हनुमान जी की आराधना करने से वे भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
बुढ़वा मंगल की पूजा विधि:
इस दिन पास के किसी हनुमान मंदिर या राम दरबार में जाकर सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और आरती का पाठ किया जाता है। साथ ही सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी होता है।
मंत्र :
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय
प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
मान्यता है कि जब श्रीराम माता सीता की खोज में निकले थे, तब हनुमान जी से उनकी पहली भेंट ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही हुई थी। यह दिन तभी से धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
लखनऊ की इस परंपरा का मुगल काल से जुड़ाव:
एक कहानी के अनुसार नवाब वाजिद अली शाह के पुत्र की तबीयत अत्यधिक खराब हो गई थी। किसी उपाय से लाभ न मिलने पर उन्हें अलीगंज स्थित एक हनुमान मंदिर में मन्नत मानने की सलाह दी गई। वहां प्रार्थना करने के बाद उनके पुत्र की तबीयत में सुधारने लगी। इसके उपरांत नवाब और उनकी बेगम ने उस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जो ज्येष्ठ माह में पूर्ण हुआ। तभी से लखनऊ में बड़ा मंगल के दिन भंडारे और गुड़ के प्रसाद वितरण की परंपरा शुरू हो गई।
Next Story