धर्म-अध्यात्म

Apara Ekadashi 2025: जानिए मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी व्रत

Sarita
6 May 2025 12:18 PM IST
Apara Ekadashi 2025: जानिए मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी व्रत
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Apara Ekadashi 2025: अपरा एकादशी का यह व्रत पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है. अपरा एकादशी का व्रत बहुत पुण्यदायी माना जाता है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से बड़े-बड़े पापों का नाश होता है. यह व्रत करने से मनुष्य को अपार धन, यश और सम्मान की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या, गोहत्या, परनिंदा जैसे पापों से भी मुक्ति मिलती है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है. इसकी एकादशी की कथा सुनने और पढ़ने से हजार गौदान का फल मिलता है|
अपरा एकादशी कब है:
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 23 मई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा|
अपरा एकादशी की पूजा विधि :
दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. एकादशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें. चंदन, फूल, धूप और दीप जलाकर उनकी पूजा करें. तुलसी दल अवश्य अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी डालकर भोग लगाएं|
भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है. अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें. भगवान विष्णु की आरती गाएं. अपनी क्षमतानुसार गरीबों को वस्त्र, भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें. द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत खोलें|
अपरा एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जो गंगा स्नान, स्वर्ण दान, भूमि दान और गौ दान के समान है. धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मान-सम्मान और यश बढ़ता है. मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है|
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