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Anant Chaturdashi 2025: जानें गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त और परंपराएं

Sarita
1 Sept 2025 10:17 AM IST
Anant Chaturdashi 2025: जानें गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त और परंपराएं
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Anant Chaturdashi 2025: गणेश उत्सव इस साल 27 अगस्त 2025 को धूमधाम से शुरू हुआ था। अब बप्पा को विदाई देने का समय करीब आ गया है। गणपति उत्सव का समापन 6 सितंबर 2025, शनिवार को होगा। इस दिन अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी, जिसे गणेश विसर्जन का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह वह दिन है जब भक्त गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ और उन्हें अगले बरस फिर आने का बुलावा देंगे, के जयकारों के साथ बप्पा को धूमधाम से विदाई देंगे।
गणेश विसर्जन 2025, शुभ मुहूर्त:
अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश विसर्जन के लिए सबसे शुभ होता है। इस दिन कई शुभ मुहूर्त होते हैं, जिनमें आप बप्पा को विदाई दे सकते हैं।
प्रातःकाल मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)
सुबह 7:44 से 9:18
सुबह 9:18 से 10:52
सुबह 10:52 से 12:26
दोपहर मुहूर्त
दोपहर 1:59 से 3:33
शाम मुहूर्त
शाम 6:41 से 8:07
गणेश विसर्जन की पारंपरिक विधि:
गणेश विसर्जन से पहले, भक्त कुछ विशेष अनुष्ठान करते हैं ताकि विदाई शुभ और पूर्ण हो। विसर्जन से पहले गणपति की मूर्ति की अंतिम बार पूजा की जाती है। उन्हें लड्डू, मोदक और अन्य पसंदीदा व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणपति की आरती करते हैं और "ॐ गं गणपतये नमः" जैसे मंत्रों का जाप करते हैं। विसर्जन से पहले, अक्षत (चावल) और दही को लाल कपड़े में बांधकर गणपति की मूर्ति के पास रखा जाता है।
यह समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। विसर्जन के समय, भक्तगणपति से प्रार्थना करते हैं कि वे सारी नकारात्मकता अपने साथ ले जाएँ और अगले वर्ष फिर उनके घर पधारें। मूर्ति को सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित किया जाता है। इस प्रक्रिया में पर्यावरण का ध्यान रखना भी ज़रूरी है। मिट्टी से बनी पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों का विसर्जन पर्यावरण के लिए बेहतर होता है।
गणेश विसर्जन का महत्व:
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव का उत्सव है। इन दस दिनों के दौ
रान, भक्त अप
ने घरों में गणपति की मूर्ति स्थापित करते हैं, उनकी पूजा करते हैं और विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी दुखों और कष्टों को दूर कर देते हैं। अनंत चतुर्दशी भगवान गणेश की विदाई का दिन है। इस दिन मूर्ति को पवित्र जल में विसर्जित किया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि भगवान गणेश अपने लोक लौट रहे हैं। यह विसर्जन जीवन चक्र के प्रतीकात्मक महत्व को दर्शाता है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है।
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