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लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित नहीं, PM मोदी ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार

Shantanu Roy
18 April 2026 7:36 PM IST
लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित नहीं, PM मोदी ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
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New Delhi. नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल को शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को पारित नहीं किया जा सका। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi का पहला बयान सामने आया है। तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्ष, खासकर Indian National Congress और Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) पर निशाना साधा और बिल पास न होने के लिए उन्हें जिम्मेदार बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि यह संशोधन बिल पारित हो जाता, तो देश की महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलता। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकार और उनकी राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा हुआ है। पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन आगे भी इस दिशा में प्रयास जारी रखेगा। तमिलनाडु में जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों के बीच अपनी भावना व्यक्त करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया था, जो महिला आरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम था। इसके बाद 16 अप्रैल 2026 को संसद और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई थी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर देना है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विपक्ष के सहयोग के बिना ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करना कठिन हो जाता है।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एक तरफ सत्तापक्ष इस मुद्दे को महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, वहीं विपक्ष ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और बिल को लेकर अलग-अलग तर्क प्रस्तुत किए हैं। हालांकि, संसद में बिल पारित न हो पाने के कारण फिलहाल महिला आरक्षण को लेकर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में इस विषय को फिर से संसद में लाया जा सकता है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और चर्चा होने की संभावना है।
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