भारत
एफआरआई के उपयोग से संदिग्ध लेनदेन की पहचान, वित्तीय जोखिम रोका
Shantanu Roy
19 April 2026 5:29 PM IST

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Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र, शिमला, दूरसंचार विभाग के अपर महानिदेशक वीरेंद्र कुमार ने दूरसंचार विभाग की नागरिक-केंद्रित पहलों तथा उनके समग्र प्रभाव के संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा कि पिछले दस महीनों में एफआरआई (फाइनांशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर) के उपयोग से लगभग 2300 करोड़ की वित्तीय हानि को रोका है। वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक एफआरआई एक जोखिम-आधारित सूचकांक है, जो संदिग्ध मोबाइल नंबरों को मध्यम, उच्च या अत्यधिक उच्च वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम की श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। ये श्रेणियां वित्तीय संस्थानों को वास्तविक समय में निवारक कार्रवाई करने में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे संदिग्ध लेन-देन की पहचान एवं अवरोधन संभव हो पाता है। साथ ही यह उपयोगकर्ताओं को अग्रिम चेतावनी भी प्रदान करता है, जिससे वे धोखाधड़ीपूर्ण भुगतान से बच सकें।
धोखाधड़ी होने से पूर्व ही उसे रोककर, एफआरआई डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभाग के अपर महानिदेशक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विभिन्न हितधारकों के बीच दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है, जिससे समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। संचार साथी ऐप नागरिकों को संदिग्ध धोखाधड़ी पूर्ण संचार की रिपोर्ट करने, खोए हुए मोबाइल को ब्लॉक करने तथा अपने नाम जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी प्राप्त करने को सशक्त बनाता है। हिमाचल प्रदेश में 565 फोर जी संतृप्ति साइटें स्थापित की जा चुकी हैं तथा ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से 3615 ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। इस योजना के तहत संचार मित्रों द्वारा 23 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
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