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Shimla. शिमला। एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के सभागार में शनिवार को नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडेशन काउंसिल) जागरूकता को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विभाग और इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (IQAC) की ओर से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शैक्षणिक डीन एवं IQAC निदेशक प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा तथा रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. आर.एल. शर्मा ने की।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शिक्षकों और विभिन्न विभागों के नैक एवं IQAC समन्वयकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, मूल्यांकन प्रक्रिया की समझ और नैक मानकों के अनुरूप संस्थान को और अधिक मजबूत बनाना रहा। मुख्य वक्ता के रूप में सेंट बेड्स कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग से डॉ. अनुपमा टंडन तोमर उपस्थित रहीं। उन्होंने नैक और इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को उपलब्ध संसाधनों, क्षमताओं और अवसरों का बेहतर उपयोग करते हुए लगातार सुधार की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।
डॉ. अनुपमा टंडन तोमर ने नैक के संशोधित ढांचे की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में शैक्षणिक संस्थानों के लिए गुणवत्ता मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाना आवश्यक है। उन्होंने डाटा वैलिडेशन एवं वेरिफिकेशन, छात्र संतुष्टि सर्वेक्षण, शोध गतिविधियों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, ग्रीन ऑडिट, विश्वविद्यालय स्तर की समितियों और सतत मूल्यांकन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने क्वालिटी इंडिकेटर फ्रेमवर्क को नैक मूल्यांकन की आधारशिला बताते हुए इसकी उपयोगिता पर जोर दिया। उनके अनुसार यह फ्रेमवर्क संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सुधार की दिशा तय करता है।
कार्यक्रम के अंत में शैक्षणिक डीन प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि नैक और IQAC संस्थान की शैक्षणिक साख को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और रोजगार अवसरों को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से गुणवत्ता सुधार की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. आर.एल. शर्मा ने मुख्य वक्ता डॉ. अनुपमा टंडन तोमर सहित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं संस्थान को नैक मूल्यांकन के लिए अधिक तैयार और सक्षम बनाती हैं। इस अवसर पर डीन इंजीनियरिंग प्रो. डॉ. अंकित ठाकुर, साइंसेज एवं हेल्थ एवं पैरामेडिकल विभाग की प्रमुख डॉ. मनिंदर कौर सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्ष और संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने नैक प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और संस्थागत गुणवत्ता सुधार के लिए अपने सुझाव साझा किए।
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