
भारत | होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारत की विविधता का रंगीन उत्सव है। अलग-अलग राज्यों में इसे अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं यह प्रेम और भक्ति से जुड़ी होती है तो कहीं इसका रंग वीरता और शक्ति से सराबोर होता है। आइए जानते हैं कि देशभर में इस रंगों के पर्व को कैसे मनाया जाता है।
गोवा में शिमगो
गोवा में होली को ‘शिमगो’ कहा जाता है। इस दिन पारंपरिक संगीत, लोकनृत्य और झांकियां निकाली जाती हैं। रात में होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन धूमधाम से रंग खेला जाता है।
पश्चिम बंगाल में डोल पूर्णिमा
बंगाल में इसे 'डोल पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है। इसमें भक्त भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियों को झूले पर रखकर श्रद्धा भाव से झूमते हैं। रंगों की बौछार के साथ कीर्तन और भजन होते हैं।
पंजाब में होला-मोहल्ला
पंजाब में होली को ‘होला-मोहल्ला’ के रूप में मनाया जाता है। यह खासतौर पर सिख समुदाय का एक प्रमुख पर्व है। इसमें घुड़सवारी, युद्धकला प्रदर्शन और धार्मिक प्रवचन होते हैं।
उत्तर प्रदेश में लट्ठमार होली
बरसाना और नंदगांव की ‘लट्ठमार होली’ दुनियाभर में मशहूर है। इसमें महिलाएं लाठियों से पुरुषों को मारती हैं और पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं। यह भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की अनूठी झलक प्रस्तुत करता है।
महाराष्ट्र में रंगपंचमी
महाराष्ट्र में होली के पांचवें दिन ‘रंगपंचमी’ मनाई जाती है। यहां गुलाल और रंगों से जमकर होली खेली जाती है। इस दौरान लोक नृत्य और संगीत की धूम रहती है।
बिहार और झारखंड में फगुआ
बिहार और झारखंड में होली को 'फगुआ' कहा जाता है। इस दिन ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं और रंग-गुलाल उड़ाए जाते हैं।
मणिपुर में याओसांग
मणिपुर में होली को 'याओसांग' कहा जाता है, जो पांच दिनों तक चलता है। इसमें थबल चोंगबा (नृत्य) का विशेष आयोजन होता है और कृष्ण भक्ति से जुड़ी झांकियां निकाली जाती हैं।
उत्तराखंड में बैठकी होली
उत्तराखंड में होली ‘बैठकी होली’ के रूप में मनाई जाती है। यह भजन और शास्त्रीय संगीत के माध्यम से मनाया जाता है, जिसमें भक्त बैठकर होली के गीत गाते हैं।





