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हिमाचल में मत्स्य क्षेत्र ने खोले रोजगार-समृद्धि के नए द्वार

Shantanu Roy
8 Jun 2026 4:12 PM IST
हिमाचल में मत्स्य क्षेत्र ने खोले रोजगार-समृद्धि के नए द्वार
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Shimla. शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति के दौर से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक गतिविधि के रूप में देखा जाने वाला यह क्षेत्र आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। राज्य सरकार की योजनाओं के फलस्वरूप जनवरी, 2023 से मार्च, 2026 के बीच प्रदेश में कुल 60,799.66 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 972.46 करोड़ रुपए रही। वर्ष 2023-24 में जहां 17,721.64 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, वहीं 2024-25 में यह ब?कर 19,019.83 मीट्रिक टन और 2025-26 में रिकॉर्ड 20,005.97 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। वर्ष 2023 से अब तक विभिन्न मत्स्य विकास योजनाओं के माध्यम से कुल 1,553 रोजगार अवसर
सृजित किए गए।

वर्ष 2023-24 में 385, वर्ष 2024-25 में 539 तथा वर्ष 2025-26 में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के 612 अवसर सृजित किए गए हैं। जनवरी, 2023 से मार्च, 2026 के दौरान विभागीय ट्राउट फार्मों ने 235.16 लाख रुपए की 42.29 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन किया है। विभाग ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 338.16 लाख रुपए का राजस्व अर्जित किया है। एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल के मत्स्य पालकों ने उत्तराखंड को 2.5 लाख आइड ओवा और 8.5 लाख रेनबो ट्राउट फ्राई उपलब्ध करवाई गई, जो राज्य की गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान 18,649 मछुआरों को जलाशय मत्स्य पालन के माध्यम से पूर्णकालिक स्वरोजगार प्राप्त हुआ। वर्ष 2023-24 में 6,022, वर्ष 2024-25 में 6,318 तथा वर्ष 2025-26 में 6,309 मछुआरों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
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