भारत
सह-मालिक की मृत्यु के बाद कानूनी वारिस न लाने पर पूरी अपील खारिज
Shantanu Roy
1 Aug 2026 3:34 PM IST

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Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में कानून का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत दोहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सह-मालिकों से जुड़े मामलों में यदि किसी एक पक्षकार की मृत्यु हो जाती है और तय समय के भीतर उसके कानूनी प्रतिनिधियों को रिकॉर्ड पर नहीं लाया जाता, तो वह अपील आंशिक रूप से नहीं बल्कि पूरी तरह से खारिज मानी जाएगी। यह आदेश न्यायाधीश राकेश कैंथला ने अशोक कुमार शर्मा द्वारा दायर एक नियमित द्वितीय अपील को खारिज करते हुए सुनाया। यह कानूनी विवाद स्वर्गीय राम रतन शर्मा की संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर था। उनके बेटे अशोक कुमार शर्मा (अपीलकर्ता) ने एक सिविल सूट दायर कर दावा किया था कि वह, उनके भाई और उनकी एक बहन इस जमीन के सह-मालिक हैं। दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष का दावा था कि स्वर्गीय राम रतन शर्मा ने उनके पक्ष में 25 अप्रैल, 1989 को एक वसीयत निष्पादित की थी। कांगड़ा (धर्मशाला) की निचली अदालत और जिला अदालत दोनों ने वसीयत को सही मानते हुए अशोक शर्मा के सह-मालिकाना हक के दावे को खारिज कर दिया था।
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