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भीषण गर्मी के बीच बढ़ गया एक और खतरा, जरा सी चूक और सब हो जाएगा खत्म

Shantanu Roy
10 Jun 2026 10:08 PM IST
भीषण गर्मी के बीच बढ़ गया एक और खतरा, जरा सी चूक और सब हो जाएगा खत्म
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हिमाचल। हिमाचल समेत देशभर में इन दिनों गर्मी सितम ढा रही है। सूरज की तपिश न केवल लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है, बल्कि कई तरह के हादसों की वजह भी बन रही है। जलती हुई जमीन, धधकते जंगल और बढ़ते तापमान की खबरें तो आपने खूब सुनी होंगी, लेकिन इन दिनों एक और खतरा तेजी से बढ़ रहा है और वह है वाहनों में आग लगने की घटनाएं। कहीं चलते-चलते कार आग का गोला बन जाती है तो कहीं स्कूटी या बाइक देखते ही देखते धू-धू कर जल उठती है। कई मामलों में तो इन हादसों ने लोगों की जान तक ले ली है। ऐसे में
सवाल
यह है कि आखिर गर्मियों के मौसम में गाड़ियों में आग लगने के मामले क्यों बढ़ जाते हैं.तो चलिए आज इसी पर बात करते हैं। गर्मियों में वाहनों में आग लगने का सबसे आम कारण इंजन का जरूरत से ज्यादा गर्म होन है, भीषण गर्मी के दौरान अगर वाहन का कूलिंग सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा हो तो इंजन का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। रेडिएटर में कूलेंट की कमी, कूलिंग फैन की खराबी या इंजन से जुड़ी अन्य तकनीकी समस्याएं वाहन को ओवरहीट कर सकती हैं। जब इंजन जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है तो आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसके अलावा पुरानी या क्षतिग्रस्त वायरिंग भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कई बार ढीले कनेक्शन, खराब बैटरी या वायरिंग में खराबी के कारण शॉर्ट सर्किट हो जाता है, शॉर्ट सर्किट के दौरान निकली चिंगारी आसपास मौजूद ज्वलनशील पदार्थों के संपर्क में आते ही आग को जन्म दे सकती है। वाहन मालिक अक्सर खर्च बचाने के लिए देसा वायरिंग या स्थानीय स्तर पर फिटिंग करवा लेते हैं, जो बाद में गंभीर खतरा साबित हो सकती है। यही नहीं ईंधन प्रणाली में खराबी भी आग लगने की एक बड़ी वजह है। पेट्रोल या डीजल की पाइपलाइन में मामूली लीकेज भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इंजन की गर्मी और ईंधन के संपर्क में आने से आग भड़कने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। खासतौर पर पुराने वाहनों में पाइपों का घिस जाना, क्लैंप का ढीला पड़ जाना या फ्यूल टैंक से जुड़ी खराबियां जोखिम बढ़ा देती हैं। ऐसे में अगर गाड़ी में पेट्रोल या डीजल की गंध महसूस हो तो इसे कभी भी नजरअंदाज न करें, इसी तरह कई बार ये भी देखा गया है कि एसी सिस्टम की खराबी भी आग का कारण बन गई। एसी गैस में लीकेज, खराब कंप्रेसर या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में आई दिक्कतें गर्मियों में वाहन के भीतर आग लगने का खतरा बढ़ा सकती हैं.. हालांकि हर बार तकनीकी खराबी ही जिम्मेदार नहीं होती, कई बार वाहन चालकों की लापरवाही भी बड़े हादसों को न्योता देती है। समय पर सर्विस न करवाना, गाड़ी की तकनीकी फिटनेस पर ध्यान न देना और सुरक्षा मानकों के विपरीत मॉडिफिकेशन करवाना जोखिम को बढ़ा देता है। घटिया या नॉन-स्टैंडर्ड स्पेयर पार्ट्स का इस्तेमाल भी वाहन में आग लगने की आशंका को काफी बढ़ा सकता है।

ऐसे में गर्मियों में वाहनों को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। लगातार चलने से टायर अत्यधिक गर्म हो सकते हैं। यदि टायर में हवा कम हो तो गर्म सड़क पर उनके फटने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दुर्घटना और आग दोनों की आशंका पैदा हो सकती है। इसलिए किसी भी लंबे सफर पर निकलने से पहले टायरों की स्थिति और हवा का दबाव जरूर जांच लें। अगरवाहन लंबे समय से लगातार चल रहा हो और अत्यधिक गर्म हो गया हो तो कुछ समय के लिए उसे रोककर ठंडा होने देना बेहतर होता है। इतना ही नहीं, कई बार हम अपनी गाड़ी में कुछ ऐसी चीजें रखकर भूल जाते हैं जो पलभर में बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं। लाइटर, परफ्यूम, सैनिटाइजर, गैस वाले स्प्रे या अन्य ज्वलनशील पदार्थ गर्मी के दौरान वाहन के अंदर अत्यधिक तापमान के कारण आग का कारण बन सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि गाड़ी में रखी एक साधारण पानी की बोतल भी खतरा पैदा कर सकती है। पारदर्शी प्लास्टिक या कांच की बोतलें कई बार लेंस की तरह काम करती हैं। जब सूर्य की किरणें इन पर पड़ती हैं तो वे एक बिंदु पर फोकस होकर सीट, डैशबोर्ड, कागज या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं को अत्यधिक गर्म कर सकती हैं। ऐसे में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तेज धूप में वाहन के अंदर ऐसी वस्तुएं छोड़ने से बचना चाहिए। हमें यहां ये समझना होगा कि वाहन में आग लगने की अधिकांश घटनाएं अचानक नहीं होतीं बल्कि छोटी-छोटी लापरवाहियों का नतीजा होती हैं। ऐसे में भीषण गर्मी के इस दौर में थोड़ी सी सावधानी आपकी लाखों की गाड़ी और आपकी जिंदगी दोनो को बचा सकती है।
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