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एयरफोर्स चीफ अमरप्रीत सिंह ने ली विदाई, 42 साल का शानदार सफर पूरा

Rajeshwari Nishad
31 Oct 2026 5:29 PM IST
एयरफोर्स चीफ अमरप्रीत सिंह ने ली विदाई, 42 साल का शानदार सफर पूरा
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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को करीब 42 वर्षों की लंबी सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए। अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनकी पत्नी सरिता सिंह भी मौजूद रहीं। अमर प्रीत सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ ही भारतीय वायुसेना में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित एक नवंबर से वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अमर प्रीत सिंह ने अपने लंबे सैन्य करियर में लड़ाकू पायलट से लेकर वायुसेना के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया। उन्होंने वायुसेना के कई महत्वपूर्ण परिचालन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। उनके कार्यकाल में वायुसेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी लड़ाकू विमानों और परिचालन तैयारियों जैसे विषय विशेष रूप से चर्चा में रहे।
राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों को किया नमन
सेवानिवृत्ति के अवसर पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचे। उन्होंने शहीद जवानों की स्मृति में पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।राष्ट्रीय समर स्मारक देश के उन सैनिकों के सम्मान में बनाया गया है, जिन्होंने विभिन्न सैन्य अभियानों और संघर्षों में अपने प्राणों की आहुति दी। सैन्य अधिकारियों के लिए यहां श्रद्धांजलि अर्पित करना देश की रक्षा में बलिदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।इस मौके पर अमर प्रीत सिंह के साथ उनकी पत्नी सरिता सिंह की मौजूदगी भी रही। लंबे सैन्य करियर के समापन पर यह उनके लिए भावनात्मक क्षण रहा।
21 दिसंबर 1984 को शुरू हुआ था सैन्य सफर
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने 21 दिसंबर 1984 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।अपने लगभग 42 वर्ष के करियर में उन्होंने विभिन्न प्रकार के लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों को उड़ाया। उनके पास 5,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वह एक अनुभवी टेस्ट पायलट भी रहे हैं।
अमर प्रीत सिंह ने अपने करियर में वायुसेना के कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह वायुसेना उपप्रमुख भी रहे और इसके बाद 30 सितंबर 2024 को 28वें वायुसेना प्रमुख बने। उन्होंने करीब 25 महीने तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली वायुसेना की कमान
अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में मई 2025 का ऑपरेशन सिंदूर शामिल रहा। इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उनके नेतृत्व में वायुसेना की परिचालन तैयारियों और सैन्य क्षमताओं पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं का प्रमुख विषय रही।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 अक्टूबर को आयोजित विदाई मुलाकात में अमर प्रीत सिंह की सेवाओं की सराहना की। उन्होंने वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत बनाने और ऑपरेशन सिंदूर में निभाई गई भूमिका का उल्लेख किया।
स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस से रहा विशेष जुड़ाव
अमर प्रीत सिंह का नाम भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस कार्यक्रम से भी जुड़ा रहा है। उन्होंने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के परीक्षण और विकास से संबंधित जिम्मेदारियां निभाईं।वायुसेना प्रमुख के रूप में उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता पर जोर दिया।भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण में नए विमानों की खरीद, मौजूदा विमानों का उन्नयन, हथियार प्रणालियों का विकास और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं रही हैं।
अमर प्रीत सिंह ने कई अवसरों पर रक्षा उत्पादन परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। उनका मानना रहा कि वायुसेना की युद्धक क्षमता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक और समय पर उपकरणों की उपलब्धता आवश्यक है।
पहले प्रशिक्षक के साथ भरी करियर की आखिरी उड़ान
सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले 20 अक्टूबर को अमर प्रीत सिंह ने एक यादगार उड़ान भरी थी। उन्होंने हैदराबाद के पास एचजेटी-16 किरण एमके-1 प्रशिक्षण विमान में अपनी अंतिम आधिकारिक उड़ान पूरी की।इस उड़ान की विशेष बात यह रही कि उनके साथ उनके शुरुआती उड़ान प्रशिक्षक सेवानिवृत्त विंग कमांडर वीएस कोचर भी मौजूद थे।करीब 55 मिनट की यह उड़ान उनके सैन्य जीवन के शुरुआती दिनों की याद दिलाने वाली थी। जिस प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में उन्होंने उड़ान का प्रशिक्षण प्राप्त किया था, उसी के साथ अपने करियर की अंतिम उड़ान भरना एक विशेष क्षण रहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी विदाई
अमर प्रीत सिंह की सेवानिवृत्ति से पहले कई आधिकारिक विदाई कार्यक्रम आयोजित किए गए। 26 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे मुलाकात कर उनकी सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
इसके बाद वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों ने भी उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए। 31 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित वायुसेना स्टेशन में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले अमर प्रीत सिंह अपनी पत्नी सरिता सिंह के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मिले थे।
आशुतोष दीक्षित बने वायुसेना के 29वें प्रमुख
अमर प्रीत सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाल ली है।महत्वपूर्ण तथ्य: रक्षा मंत्रालय के 6 अक्टूबर के आधिकारिक आदेश के अनुसार आशुतोष दीक्षित की नियुक्ति 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर से प्रभावी है, न कि 1 नवंबर से।आशुतोष दीक्षित इससे पहले वायुसेना के उपप्रमुख थे। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया।वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।
3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव
नए वायुसेना प्रमुख आशुतोष दीक्षित के पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग विमानों के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, हॉक, तेजस और अन्य विमानों को उड़ाया है।
वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। अपने करियर में उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर सहित विभिन्न सैन्य अभियानों और अभ्यासों में भाग लिया है।आशुतोष दीक्षित मध्य वायु कमान के प्रमुख और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य कर चुके हैं।उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वायु सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।
नए वायुसेना प्रमुख के सामने कई चुनौतियां
आशुतोष दीक्षित ऐसे समय भारतीय वायुसेना की कमान संभाल रहे हैं, जब आधुनिक लड़ाकू विमानों की उपलब्धता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाना महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।
वायुसेना को बदलती युद्ध तकनीकों के अनुरूप अपनी तैयारियां लगातार बेहतर करनी होंगी। आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित विमान, मिसाइल रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का महत्व बढ़ रहा है।
अमर प्रीत सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ भारतीय वायुसेना में एक लंबे सैन्य करियर का समापन हुआ है। वहीं आशुतोष दीक्षित के नेतृत्व में वायुसेना आधुनिकीकरण और परिचालन तैयारियों के अगले चरण की ओर बढ़ेगी।
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