महाराष्ट्र

बीमारी की छुट्टी पर गया कांस्टेबल 12 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार, बर्खास्त

Kavita2
31 Oct 2026 5:16 PM IST
बीमारी की छुट्टी पर गया कांस्टेबल 12 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार, बर्खास्त
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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में पुलिस विभाग की छवि को प्रभावित करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। पुणे सिटी पुलिस के एक कांस्टेबल को तेलंगाना में 12 किलोग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। आरोप है कि कांस्टेबल स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का हवाला देकर आधिकारिक छुट्टी पर था, लेकिन इसी दौरान उसकी कथित संलिप्तता नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी में सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग ने उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की और बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।

बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मी की पहचान नितिन ज्ञानू शिंदे के रूप में हुई है। वह पुणे सिटी पुलिस के विश्रामबाग ट्रैफिक डिवीजन में कांस्टेबल के पद पर तैनात था। पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त (प्रशासन) संजय पाटिल ने उसकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी सेवा में अनुशासन और जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नितिन शिंदे ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 7 अक्टूबर 2026 से छुट्टी ली थी। वह आधिकारिक रूप से बीमारी के कारण ड्यूटी से अनुपस्थित था। हालांकि, इसी अवधि के दौरान तेलंगाना में नशीले पदार्थों से जुड़े मामले में उसकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।

बताया गया है कि तेलंगाना में कार्रवाई के दौरान शिंदे को 12 किलोग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसकी पहचान पुणे पुलिस के कांस्टेबल के रूप में होने पर मामला और गंभीर हो गया। एक पुलिसकर्मी का नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अपराध में आरोपी के रूप में सामने आना विभाग के लिए भी चिंता का विषय है।

मामले की जानकारी पुणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित तथ्यों का संज्ञान लिया गया। विभाग ने कांस्टेबल के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उसे सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी का आदेश अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय पाटिल की ओर से जारी किया गया।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कांस्टेबल ने बीमारी का हवाला देकर छुट्टी ली थी। पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए छुट्टी और ड्यूटी से संबंधित नियम निर्धारित होते हैं। स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी लेना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यदि इस दौरान किसी कर्मचारी की गंभीर आपराधिक मामले में संलिप्तता सामने आती है, तो विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

शिंदे के मामले में भी गिरफ्तारी और कथित मादक पदार्थ तस्करी से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने बर्खास्तगी का निर्णय लिया। हालांकि, उसके खिलाफ आपराधिक आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी पुलिसकर्मी को विभागीय कार्रवाई के तहत सेवा से बर्खास्त किया जाना और आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। विभागीय कार्रवाई सेवा नियमों और प्रशासनिक अनुशासन से संबंधित होती है, जबकि आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय करता है।

तेलंगाना में हुई गिरफ्तारी के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामला 12 किलोग्राम गांजे की बरामदगी से जुड़ा है। हालांकि, गांजा कहां से लाया गया था, उसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था और इस मामले में अन्य कितने लोग शामिल थे, इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट नहीं है कि कांस्टेबल किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़ा था या उसकी कथित भूमिका किसी एक घटना तक सीमित थी। इन सवालों के जवाब संबंधित जांच एजेंसी की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामने आ सकते हैं।

भारत में गांजा सहित प्रतिबंधित मादक पदार्थों के अवैध उत्पादन, परिवहन, बिक्री और तस्करी के मामलों में स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम यानी एनडीपीएस कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। संबंधित पदार्थ की मात्रा, आरोपी की भूमिका और अन्य परिस्थितियों के आधार पर कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।

नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई करती हैं। ऐसे में कानून लागू कराने वाली संस्था के किसी कर्मचारी का स्वयं इसी प्रकार के अपराध में आरोपी के रूप में सामने आना विशेष रूप से गंभीर माना जाता है।

पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून का पालन करने के साथ ही जनता की सुरक्षा और विभागीय अनुशासन बनाए रखें। किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने पर विभागीय जांच और उचित कार्रवाई से संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

विश्रामबाग ट्रैफिक डिवीजन में तैनात नितिन शिंदे की जिम्मेदारी यातायात व्यवस्था से संबंधित थी। ट्रैफिक पुलिसकर्मी शहर में यातायात नियमों का पालन कराने और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने में भूमिका निभाते हैं। ऐसे पद पर कार्यरत कर्मचारी के खिलाफ मादक पदार्थ तस्करी का मामला सामने आने से विभागीय स्तर पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, इस मामले के आधार पर अन्य पुलिसकर्मियों या पूरे विभाग की कार्यप्रणाली के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पुलिस प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की है और अब आपराधिक मामले की जांच अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।

इस प्रकरण में एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि कांस्टेबल ने स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी लेने के बाद तेलंगाना की यात्रा किन परिस्थितियों में की थी। उसके यात्रा विवरण और कथित तस्करी से जुड़े संपर्कों की जांच मामले को समझने में उपयोगी हो सकती है।

फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि तेलंगाना पुलिस ने शिंदे के अलावा किसी अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है या नहीं। उसके खिलाफ दर्ज मामले की धाराओं, गिरफ्तारी की सटीक तारीख और न्यायिक कार्यवाही की वर्तमान स्थिति के संबंध में भी विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

पुणे पुलिस की ओर से जारी बर्खास्तगी आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विभाग ने कांस्टेबल के खिलाफ सामने आए मामले को गंभीरता से लिया है। अब संबंधित आपराधिक प्रकरण में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

नितिन ज्ञानू शिंदे की बर्खास्तगी का मामला पुलिस सेवा में अनुशासन, कर्मचारियों की जवाबदेही और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के महत्व को सामने लाता है। फिलहाल कांस्टेबल को सरकारी सेवा से हटाया जा चुका है, जबकि उसके खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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