- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- आजमगढ़ में चक्रवात...
उत्तर प्रदेश
आजमगढ़ में चक्रवात अर्नब का कहर, हजारों एकड़ फसल बर्बाद
Rajeshwari Nishad
31 Oct 2026 5:17 PM IST

x
आजमगढ़। चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ मंडल के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंडल के आजमगढ़, मऊ और बलिया जिलों में बारिश के कारण धान सहित कई फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल के गिरने और कटाई के बाद खुले में रखी उपज के भीगने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। महीनों की मेहनत के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सामने अब आर्थिक नुकसान का खतरा खड़ा हो गया है।
धान की कटाई के महत्वपूर्ण समय पर हुई बारिश ने खेती-किसानी की गतिविधियों को प्रभावित किया है। जिन किसानों की फसल पककर तैयार हो चुकी थी, उन्हें बारिश थमने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, जिन किसानों ने कटाई पूरी कर ली थी, उनके लिए भीगी हुई उपज को सुरक्षित रखना चुनौती बन सकता है। लगातार नमी रहने से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने और भंडारण में परेशानी आने की आशंका है।
आजमगढ़, मऊ और बलिया में फसलों को नुकसान
आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं। अक्टूबर के अंतिम दिनों में कई स्थानों पर धान की फसल पकने लगती है और किसान कटाई की तैयारियों में जुट जाते हैं।
ऐसे समय पर तेज हवा और बारिश होने से धान के पौधे जमीन पर गिर सकते हैं। इसे फसल का गिरना या लॉजिंग कहा जाता है। जमीन पर गिरी फसल की कटाई में अधिक समय और मेहनत लगती है। यदि खेतों में पानी भरा रहे तो दानों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
मऊ और बलिया के निचले इलाकों में जलभराव होने की स्थिति में किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है। हालांकि, तीनों जिलों में कितने हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है।
12 घंटे की बारिश से आजमगढ़ में बिगड़े हालात
आजमगढ़ में गुरुवार की आधी रात से शुक्रवार दोपहर तक करीब 12 घंटे बारिश हुई। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, जिले में 20.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। तेज हवा और बारिश से कई इलाकों में धान की तैयार फसल जमीन पर बिछ गई।
कोइलसा, अतरौलिया, अहरौला, पवई, ठेकमा, फूलपुर, मार्टिनगंज, लालगंज और तरवां सहित कई क्षेत्रों में किसानों को नुकसान हुआ है। कुछ स्थानों पर धान की मड़ाई शुरू हो चुकी थी, जबकि कई किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे।कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा के अनुसार, खेतों में जलभराव से धान के साथ सब्जियों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
बिलरियागंज में साढ़े चार बीघा धान की फसल गिरी
आजमगढ़ के बिलरियागंज क्षेत्र में बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। पटवध कौतुक गांव के किसान संतोष राय की करीब साढ़े चार बीघा धान की फसल जमीन पर गिर गई। उनके खेत में लगभग डेढ़ फीट पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है।इसी गांव के किसान कविंद्रनाथ राय और अरुण राय की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों के मुताबिक, धान की बालियां पक चुकी थीं और कुछ दिनों में कटाई शुरू होने वाली थी।अकबरपुर, पिपरहा, जलालपुर, भगतपुर, बरौली और आसपास के कई गांवों में भी धान की फसल प्रभावित हुई है।
मऊ में खेतों में बिछी धान की फसल
मऊ जिले में भी लगातार दो दिनों तक हुई बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है।किसानों को आशंका है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो धान के दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है। गिरी हुई फसल की कटाई में भी परेशानी आएगी।किसानों के सामने अब फसल को जल्द सुरक्षित निकालने की चुनौती है। बारिश रुकने के बाद भी खेतों में अधिक नमी रहने से कृषि कार्य तुरंत शुरू करना मुश्किल हो सकता है।
बलिया में बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
बलिया जिले में भी चक्रवाती तूफान अर्नब का असर देखने को मिला। बुधवार शाम से मौसम बदलने लगा था और गुरुवार सुबह से बारिश शुरू हो गई। शुक्रवार को भी रुक-रुककर बारिश जारी रही।तेज हवा और बारिश के कारण कई इलाकों में पककर तैयार धान की फसल गिर गई। जिन किसानों ने धान काटकर सुखाने के लिए खेतों में छोड़ा था, उन्हें उपज के भीगने और खराब होने की चिंता सता रही है।बारिश के कारण खेती के साथ सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ। किसानों के अनुसार, मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो कटाई और मड़ाई में देरी से नुकसान और बढ़ सकता है।
सब्जियों और रबी की बुवाई पर भी संकट
बेमौसम बारिश का असर केवल धान तक सीमित नहीं है। आजमगढ़ में टमाटर, फूलगोभी और मिर्च जैसी सब्जियों की फसलों तथा नर्सरी में पानी भरने से नुकसान की आशंका जताई गई है।किसान अब गेहूं, चना, मटर और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे थे। लेकिन खेतों में अधिक नमी और जलभराव के कारण बुवाई का काम प्रभावित हो सकता है।यदि बुवाई में अधिक देरी होती है तो किसानों को अगली फसल की तैयारी में भी अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है।
उत्पादन घटने और लागत बढ़ने का डर
बारिश और तेज हवा से गिरी धान की फसल की कटाई सामान्य फसल की तुलना में अधिक कठिन होती है। ऐसे खेतों में मशीन से कटाई करने में परेशानी हो सकती है और मजदूरों की आवश्यकता बढ़ सकती है।
आजमगढ़ के लाटघाट क्षेत्र के कुछ किसानों ने उपज में 40 प्रतिशत से अधिक कमी आने की आशंका जताई है। हालांकि, यह किसानों का प्रारंभिक अनुमान है, पूरे जिले में नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा नहीं।धान के दानों का रंग बदलने, अंकुरण होने या सड़ने से उपज की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों ने की नुकसान के सर्वे और मुआवजे की मांग
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य मदों पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है।कई किसान फसल बेचकर घरेलू खर्च और कृषि ऋण चुकाने की उम्मीद लगाए हुए थे। ऐसे में अचानक मौसम खराब होने से उनकी आर्थिक चिंता बढ़ गई है।फिलहाल आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों में कुल कितनी फसल खराब हुई है और कितने किसानों को नुकसान पहुंचा है, इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
अब मौसम साफ होने और राहत मिलने का इंतजार
चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई बारिश ने पूर्वांचल के किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। खेतों में गिरी फसल को बचाना, जलनिकासी करना और अगली बुवाई की तैयारी करना उनकी प्राथमिकता बन गई है।किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द नुकसान का आकलन करेगा और पात्र प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता मिलेगी।
Next Story





