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धर्मशाला। कांगड़ा जिला में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां इन दिनों पूरे शबाब पर हैं, लेकिन जेठ (मई) महीने की प्रचंड गर्मी ने चुनावी मैदान में उतरे करीब 17 हजार छह से अधिक प्रत्याशियों की मुश्किलें बुरी तरह बढ़ा दी हैं। आसमान से बरसती आग और तपते माहौल के बीच जिले की 846 पंचायतों में तीन चरणों में होने वाले चुनाव को लेकर उम्मीदवार गांव-गांव जाकर लोगों से समर्थन मांग रहे हैं। हालांकि, कुदरत का यह कड़ा मिजाज नेताओं और उनके समर्थकों के हौसलों की कड़ी परीक्षा ले रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि दोपहर के समय गांवों की गलियां पूरी तरह सुनसान नजर आती हैं, जिससे चुनावी प्रचार की रफ्तार पर भी असर पड़ रहा है। तेज धूप और झुलसाने वाली गर्म हवाओं के कारण प्रत्याशियों को ऐन वक्त पर अपनी प्रचार रणनीति बदलने को मजबूर होना पड़ा है। अब दिन के बजाय सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद ही चुनावी गतिविधियां ज्यादा दिखाई दे रही हैं। प्रत्याशी दोपहर की तपिश से बचने के लिए टाइम-टेबल बदल चुके हैं और अब गले में तौलिया डालकर, सिर पर छाता ताने घर-घर पहुंच रहे हैं। इस परीक्षा की घड़ी में उम्मीदवार मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट देने की भावुक अपील भी कर रहे हैं। मई महीने की गर्मी में महिला उम्मीदवारों की मुश्किलें अधिक बढ़ा रखी हैं।
हालांकि इस भीषण गर्मी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। गांवों में कहीं नुक्कड़ बैठकों का दौर चल रहा है, तो कहीं चौपालों और चाय की दुकानों पर जीत-हार के समीकरणों को लेकर तीखी चर्चाएं हो रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार चुनावी मुद्दों के साथ-साथ रिकॉर्ड तोड़ गर्मी भी लोगों की बातचीत का मुख्य विषय बनी हुई है। मैदान में डटे प्रत्याशियों का कहना है कि वोट मांगने के लिए उन्हें घंटों पैदल चलना पड़ रहा है और इस तेज धूप में प्रचार करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। खुद को लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए कई उम्मीदवार अपने साथ पानी की बोतल, तौलिया और छाता लेकर ही घर से निकल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर मतदाता भी उम्मीदवारों की इस कड़ी मेहनत और लगन को देखकर काफी प्रभावित हैं। तपती धूप में वोट मांगने आ रहे नेताओं का ग्रामीण भी दिल खोलकर स्वागत कर रहे हैं और उन्हें पीने के लिए ठंडा पानी व बैठने के लिए छांव की व्यवस्था कर रहे हैं। कांगड़ा जिला में पंचायत चुनाव तीन चरणों में संपन्न होने हैं। जैसे-जैसे चुनावी प्रक्रिया तेज हो रही है, गांवों में राजनीतिक हलचल और गुटबाजी भी बढ़ती जा रही है। बहरहाल, जेठ की यह तपती दुपहरी इस बार के पंचायत चुनावी रंग में गर्मी का एक अलग ही तडक़ा लगा रही है।
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