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Nerchowk. नेरचौक। उपमंडल बल्ह की पंचायत ढाबन की रहने वाली नैन्सी की कहानी आज पूरे क्षेत्र के लिए साहस की मिसाल बन चुकी है। वर्तमान में 18 वर्ष की हो चुकी नैन्सी अपने 13 वर्षीय छोटे भाई और 80 प्रतिशत मानसिक रूप से दिव्यांग पिता की जिम्मेदारी अकेले अपने नाजुक कंधों पर उठा रही है, लेकिन उसने कभी अपना आत्मसम्मान और हौसला नहीं खोया। पिछले वर्ष क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान जब एसडीएम बल्ह क्षेत्र के दौरे पर थीं, तब उनकी मुलाकात इस बेसहारा परिवार से एक जर्जर आशियाने में हुई थी। घर में बड़ों के नाम पर केवल एक बुजुर्ग दादी थीं,जिनका भी उस दौरान एक सप्ताह पहले ही निधन हो गया था।
मासूम नैन्सी के मुंह से यह सुनना कि अब बस हम ही बचे हैं और घर का सारा काम मैं ही करती हूँ, मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के दिलों को झकझोर गया था। बच्चों की यह दयनीय स्थिति देखकर महिला अधिकारी स्मृतिका नेगी ने तत्काल राहत सामग्री जैसे कंबल, बर्तन व तिरपाल तो उपलब्ध करवाए ही, साथ ही दोनों बच्चों को एक सरकारी योजना से जोडक़र 4-4 हजार प्रतिमाह की आर्थिक पेंशन भी स्वीकृत करवाई। लेकिन बच्चों के लिए एक सुरक्षित मकान सबसे बड़ी जरूरत थी, जिसके लिए एसडीएम स्वयं तीन बार उनके घर गईं और लगातार परिवार के संपर्क में रहीं। इसी बीच, प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के अंतर्गत घर निर्माण की स्वीकृति मिलते ही विभाग द्वारा पहली किस्त जारी कर दी गई। मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब एसडीएम बल्ह के विशेष अनुरोध पर मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ने आगे आकर मकान निर्माण का पूरा जिम्मा अपने ऊपर ले लिया।
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