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Uttarakhand उत्तराखंड: शुक्रवार को भारत-चीन सीमा पर स्थित सीमांत जिले चमोली के माणा के पास हुए भीषण हिमस्खलन में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए सुबह से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आज भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश की संभावना है। वहीं, चमोली में हिमस्खलन का खतरा बरकरार है। चमोली के माणा में हुए हिमस्खलन को देखते हुए एसडीआरएफ मुख्यालय जौलीग्रांट से अलर्ट जारी कर दिया गया और जौलीग्रांट, सहस्रधारा और गोचर में तीन हाई एल्टीट्यूड रेस्क्यू टीमें तैनात कर दी गईं। बर्फ में फंसे एक और घायल मजदूर को ज्योतिर्मठ लाया गया है। अब सात मजदूरों की तलाश जारी है। सुबह से अब तक जवानों ने नौ मजदूरों को रेस्क्यू कर लिया है। 48 मजदूरों को बचा लिया गया है। मौसम साफ होते ही टीमें हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू उपकरणों के साथ रवाना हो गईं।
आठ-आठ लोगों की दो टीमें गोचर और सहस्रधारा में और बटालियन की दस लोगों की एक टीम जौलीग्रांट मुख्यालय में तैनात की गई एसडीआरएफ में अलर्ट जारी कर दिया गया है। घायलों को एम्स ऋषिकेश लाया जाता है तो इसके लिए ढालवाला टीम को अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस महानिदेशक रिधिम अग्रवाल ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बचाव के लिए तीन टीमों को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया है। मौसम ठीक होने पर टीमें घटना स्थल के लिए रवाना हो गईं। टीम में दक्ष जवानों को भेजा गया है। भारत-चीन सीमा पर स्थित सीमांत जिले चमोली के माणा के पास हुए भीषण हिमस्खलन में फंसे मजदूरों को निकालने का काम जारी है। सफेद रेगिस्तान में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए मौसम साफ होते ही माणा में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।
अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। उम्मीद है कि फंसे बाकी मजदूरों को भी सुरक्षित निकाल लिया जाएगा। घटना स्थल से मिली जानकारी के अनुसार बाकी मजदूर एक कंटेनर में हैं, जो पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हिम आपदा प्रभावित क्षेत्र माणा, चमोली के लिए देहरादून से रवाना हुए। उनके साथ गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे भी रवाना हुए। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार भारतीय सेना ने सुबह 14 और लोगों को बचा लिया है। कुछ को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका उपचार चल रहा है।
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बीच शुक्रवार को भारत-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र में माणा कैंप के पास भीषण हिमस्खलन हुआ। इस दौरान वहां निर्माण कार्य में लगे 55 मजदूर बर्फ में दब गए। शुक्रवार शाम पांच बजे तक 33 मजदूरों को सेना और आईटीबीपी के जवानों ने सुरक्षित निकाल लिया, जबकि 22 मजदूरों का पता नहीं चल सका। देर शाम तक उनकी तलाश की गई, लेकिन इसके बाद भारी बर्फबारी और क्षेत्र में आठ फीट तक बर्फ जमने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। मौसम साफ होने के बाद शनिवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है।
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