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उत्तराखंड : अनुपूरक बजट की तैयारियों और छठे राज्य वित्त आयोग से जुड़े अगले कदमों पर निगाहें टिकी हैं। विधानसभा सत्र से पहले अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने में जुटी है। विभागों की मांगों और उपलब्ध संसाधनों के परीक्षण के बाद अनुपूरक बजट का अंतिम आकार निर्धारित होगा। हालांकि, संबंधित कैबिनेट बैठक में बजट को मंजूरी मिलने और वित्त आयोग पर नए निर्णय की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए जा रहे अनुपूरक बजट का आकार पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान सामने आया है। विभागों ने विकास योजनाओं की जरूरतों के अनुसार अपने प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे हैं। इन प्रस्तावों की समीक्षा के बाद बजट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे 27 अक्टूबर से गैरसैंण के भराड़ीसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने की तैयारी है।
अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार उन वित्तीय आवश्यकताओं के लिए प्रावधान करती है, जिनके लिए मुख्य बजट में स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं होती या वर्ष के दौरान अतिरिक्त जरूरत सामने आती है। इसलिए इसका महत्व केवल कुल धनराशि तक सीमित नहीं है। किस विभाग को कितना अतिरिक्त प्रावधान मिलेगा और किन कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, यह बजट के विस्तृत दस्तावेज सामने आने पर स्पष्ट होगा।
उत्तराखंड के बजट निदेशालय की वेबसाइट पर भी वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुपूरक मांगों और प्रथम अनुपूरक बजट से संबंधित बैठक के दस्तावेज सूचीबद्ध हैं। इससे अतिरिक्त बजट की तैयारी की प्रक्रिया की पुष्टि होती है। निदेशालय के अनुसार, वह बजट अनुमान, परिवर्तित अनुमान और अनुदान की अनुपूरक मांग जैसे वित्तीय दस्तावेज तैयार करता है, जिन्हें विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
कैबिनेट की स्वीकृति और विधानसभा से बजट पारित होने की प्रक्रिया को अलग-अलग समझना भी जरूरी है। मंत्रिमंडल प्रस्ताव को सदन में रखने की मंजूरी दे सकता है। इसके बाद विधानसभा की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में बैठक से पहले अनुपूरक बजट को अंतिम रूप से पारित बता देना सही नहीं होगा। फिलहाल अतिरिक्त धन की संभावित व्यवस्था और उसके विभागवार वितरण पर आधिकारिक विवरण का इंतजार है। छठे राज्य वित्त आयोग के मामले में भी पहले हो चुकी कार्रवाई महत्वपूर्ण है। चार अक्टूबर को बनबसा में हुई मंत्रिमंडल बैठक में आयोग के पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी गई थी। इस कारण अब आयोग के गठन को नया प्रस्ताव बताने के बजाय उसकी रिपोर्ट और उससे संबंधित आगे की प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।
राज्य वित्त आयोग स्थानीय संस्थाओं की वित्तीय व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण संवैधानिक माध्यम है। उत्तराखंड वित्त आयोग निदेशालय के अनुसार, संविधान के प्रावधानों के तहत पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाता है। नगर निकायों से संबंधित वित्तीय समीक्षा की भी संवैधानिक व्यवस्था है। इस पृष्ठभूमि में आयोग की सिफारिशें ग्रामीण और शहरी स्थानीय प्रशासन के लिए महत्व रखती हैं। भारत
स्थानीय निकायों के लिए हाल में स्वीकृत धनराशि भी इसी संदर्भ में उल्लेखनीय है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तीसरी किस्त के रूप में शहरी स्थानीय निकायों के लिए 328 करोड़ 27 लाख 80 हजार रुपये जारी करने की मंजूरी दी है। यह स्वीकृति छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों की प्रत्याशा में, पंचम राज्य वित्त आयोग के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष के आवंटन के आधार पर दी गई है। इसके अतिरिक्त तीन गैर-निर्वाचित निकायों के लिए अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 की दूसरी छमाही की किस्त के रूप में कुल तीन करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। हालांकि, इन स्वीकृतियों को छठे राज्य वित्त आयोग की सभी सिफारिशें लागू होने की घोषणा नहीं माना जा सकता। आयोग से संबंधित नई व्यवस्था, आवंटन के आधार और प्रभावी अवधि की स्थिति संबंधित सरकारी निर्णय से ही स्पष्ट होगी।
अब अनुपूरक बजट और वित्त आयोग से जुड़े आधिकारिक प्रस्तावों पर नजर रहेगी। अतिरिक्त बजट का अंतिम आकार, विभागों को मिलने वाली राशि और स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय व्यवस्था का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही इन कदमों के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी बजट की तैयारी और आयोग की रिपोर्ट पर पहले हुई कार्रवाई की पुष्टि करती है; नई मंजूरी की घोषणा का इंतजार बना हुआ है।
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