उत्तराखंड
सेना के जवानों के सामने गिरा हेलीकॉप्टर, बुरी तरह झुलसे सवार
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 8:37 PM IST

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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसा हो गया। बदरीनाथ धाम से देहरादून जा रहा निजी विमानन कंपनी ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर ज्योतिर्मठ क्षेत्र की पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार कर्नाटक के पांच यात्रियों और दिल्ली निवासी पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर ने दोपहर करीब 1 बजकर 14 मिनट पर बदरीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ान भरी थी। इसके कुछ समय बाद ही ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर विमान का संपर्क टूट गया और ट्रैकिंग सिस्टम से भी उसकी लोकेशन मिलनी बंद हो गई। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, सेना, पुलिस, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। खोजबीन के दौरान चाई गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर का मलबा मिला। हादसे की खबर से उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक तक शोक की लहर दौड़ गई।
बदरीनाथ से देहरादून जा रहा था हेलीकॉप्टर
जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर का संचालन ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-HCX बताया गया है।हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से पांच यात्रियों को लेकर देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था।उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के अनुसार, उड़ान भरने के बाद हेलीकॉप्टर ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर पहुंचा था। इसी दौरान विमान से संपर्क टूट गया।इसके बाद ट्रैकिंग सिस्टम पर भी उसकी स्थिति दिखाई देनी बंद हो गई।अचानक संपर्क टूटने से विमानन अधिकारियों की चिंता बढ़ गई। तत्काल जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देकर तलाश शुरू कराई गई।
पांडुकेश्वर के पास पहाड़ियों में हुआ हादसा
शुरुआती सूचनाओं में हेलीकॉप्टर के पांडुकेश्वर के आसपास पहाड़ी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की बात सामने आई थी।बाद में प्रशासनिक और पुलिस सूत्रों ने ज्योतिर्मठ के नजदीक चाई गांव के पास मलबा मिलने की पुष्टि की।जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर दोपहर करीब 2 बजकर 20 मिनट पर जेपी पावर हाउस और मारवाड़ी पुल के आसपास पहाड़ी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।घटनास्थल दुर्गम होने के कारण राहत एवं बचाव दलों को वहां पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।पहाड़ी रास्तों और प्रतिकूल मौसम के बीच बचावकर्मियों ने दुर्घटनास्थल तक पहुंचने का प्रयास किया।मौके पर हेलीकॉप्टर का मलबा बिखरा हुआ मिला।
कर्नाटक के पांच यात्रियों की हुई मौत
हादसे में मारे गए पांचों यात्री कर्नाटक के बेंगलुरु के निवासी थे।पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रारंभिक पहचान के अनुसार, मृतकों में प्रताप, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराज शामिल हैं।वहीं, हेलीकॉप्टर के पायलट की पहचान कैप्टन हिमांशु के रूप में हुई है। वह दिल्ली के निवासी बताए गए हैं।रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में एक पुलिस अधिकारी और एक वकील भी शामिल थे।इस दर्दनाक घटना में किसी भी यात्री के जीवित बचने की सूचना नहीं मिली है।चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि की।हादसे के बाद शवों को निकालने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए बचाव अभियान चलाया गया।
सेना और SDRF ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
हेलीकॉप्टर लापता होने की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।भारतीय सेना, राज्य आपदा प्रतिवादन बल यानी एसडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों को घटनास्थल की ओर रवाना किया गया।पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ की ओर से बचाव दलों को पहाड़ी क्षेत्र में भेजा गया।हेलीकॉप्टर की तलाश के लिए ड्रोन की सहायता भी ली गई।रिपोर्टों के अनुसार, चाई गांव के आसपास पहाड़ी क्षेत्र में धुआं दिखाई देने के बाद बचाव दलों को दुर्घटनास्थल तक पहुंचने में मदद मिली।
इसके बाद हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले में हुए हेलीकॉप्टर हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया।उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।मुख्यमंत्री ने हादसे की प्रारंभिक सूचना मिलने के बाद अधिकारियों से जानकारी ली और राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी की।उन्होंने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ को समन्वय के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।शुरुआती चरण में मुख्यमंत्री ने गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को बेहतर उपचार के लिए तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा था।
हालांकि, बाद में सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि हो गई।
खराब मौसम के बीच हुई दुर्घटनाहादसे के समय चमोली जिले में मौसम की स्थिति खराब बनी हुई थी।कई पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश, बर्फबारी और कम दृश्यता की जानकारी सामने आई थी।हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बदलने वाला मौसम हेलीकॉप्टर संचालन के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।ऊंची पहाड़ियों के बीच बादल, तेज हवाएं और सीमित दृश्यता पायलटों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना का वास्तविक कारण अभी प्रमाणित नहीं हुआ है।तकनीकी खराबी, मौसम संबंधी परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की जांच के बाद ही हादसे की वजह सामने आ सकेगी।
ट्रांस भारत कंपनी के हेलीकॉप्टरों की उड़ानें रोकी गईं
हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन कंपनी के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े की उड़ानें रोक दी हैं।यह फैसला विमानन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।प्राधिकरण के अनुसार, दुर्घटना की जांच में हेलीकॉप्टर की तकनीकी स्थिति, उड़ान से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक जानकारियों की समीक्षा की जाएगी।हेलीकॉप्टर का संपर्क क्यों टूटा और ट्रैकिंग सिस्टम पर उसकी स्थिति अचानक दिखाई देना क्यों बंद हो गई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।फिलहाल कंपनी के हेलीकॉप्टरों की उड़ानें रोके जाने को एहतियाती कार्रवाई माना जा रहा है। इससे दुर्घटना के कारणों या किसी की जिम्मेदारी का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता।
चारधाम यात्रा में महत्वपूर्ण हैं हेली सेवाएं
उत्तराखंड में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए पहुंचते हैं।बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है।इन सेवाओं से यात्रियों को लंबी दूरी कम समय में तय करने की सुविधा मिलती है।लेकिन पर्वतीय इलाकों में विमानन सेवाओं का संचालन विशेष सावधानियों की मांग करता है।मौसम में अचानक बदलाव, पहाड़ी भूगोल और सीमित उड़ान मार्ग जैसी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।इसी वजह से हेलीकॉप्टरों का नियमित तकनीकी परीक्षण और मौसम संबंधी सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
उत्तराखंड में पहले भी हो चुके हैं हादसे
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं सामने आई हैं।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2026 के बीच राज्य में 12 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं, जिनमें कुल 21 लोगों की मौत हुई है।इन घटनाओं ने पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं की सुरक्षा पर लगातार सवाल खड़े किए हैं।हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा जरूर प्रदान करती हैं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।विशेषज्ञों के अनुसार, उड़ान संचालन से पहले मौसम की स्थिति और विमान की तकनीकी तैयारी का समुचित मूल्यांकन आवश्यक है।
जांच के बाद सामने आएगी हादसे की असली वजह
चमोली हेलीकॉप्टर दुर्घटना में छह लोगों की मौत से मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।कर्नाटक के पांच यात्रियों और दिल्ली निवासी पायलट की मौत ने इस हादसे को और भी दुखद बना दिया है।प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं की प्रक्रिया शुरू की है।अब दुर्घटना की तकनीकी जांच से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि हेलीकॉप्टर किस कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ।फिलहाल घटना के लिए खराब मौसम या किसी तकनीकी खामी को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
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