उत्तर प्रदेश

छात्रों के समर्थन में उतरे सपा नेता, सरकार पर बोला हमला

Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 6:11 PM IST
छात्रों के समर्थन में उतरे सपा नेता, सरकार पर बोला हमला
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी भर्ती को लेकर प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शिक्षा निदेशालय के सामने कई दिनों से धरना दे रहे अभ्यर्थियों को गुरुवार को समाजवादी पार्टी का समर्थन मिला। इलाहाबाद-झांसी क्षेत्र से नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्य डॉ. मानसिंह यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल धरनास्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और मांगों का समर्थन किया। इस दौरान सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे वादाखिलाफी करने वाली सरकार बताया।
श्यामलाल पाल ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन जब उन वादों को पूरा करने की बात आती है तो बेरोजगारों और प्रतियोगी छात्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है। पाल ने कहा, "यह सरकार धोखेबाज है, वादाखिलाफी इनके जेहन में है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में बेरोजगार, किसान, नौजवान सहित समाज का हर वर्ग परेशान है।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रतियोगी छात्र वर्षों तक मेहनत करके सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। उनके परिवार भी बड़ी उम्मीदों के साथ उनकी पढ़ाई और तैयारी में सहयोग करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया से संबंधित नियमों को लेकर असमंजस और लगातार आंदोलन की स्थिति युवाओं के भविष्य पर गंभीर असर डालती है। उन्होंने छात्रों की मांगों को सुनने और उनका समाधान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
धरनास्थल पर पहुंचे नवनिर्वाचित एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव ने भी प्रतियोगी छात्रों की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने छात्रों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। नेताओं के धरनास्थल पर पहुंचने से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिला है। वहीं, छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
दरअसल, प्रयागराज के शिक्षा निदेशालय में टीजीटी और पीजीटी भर्ती के अभ्यर्थी सोमवार 26 अक्टूबर से धरना दे रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती के लिए पुरानी नियमावली के अनुसार पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का एक अवसर दिया जाए। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि भर्ती नियमों में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने परीक्षा में शामिल होने को लेकर समस्या खड़ी हो गई है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि वे लंबे समय से अपनी मांग सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश चाहिए। उनका मानना है कि लिखित निर्णय के बिना आंदोलन समाप्त करने से भविष्य में फिर वही समस्या सामने आ सकती है।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उनके भविष्य और रोजगार के अवसरों से जुड़ा हुआ है। वे चाहते हैं कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में उनकी पात्रता से संबंधित समस्या को गंभीरता से समझे और उचित निर्णय ले।
इस बीच आंदोलन के दौरान शिक्षा निदेशालय में तनाव की स्थिति भी सामने आई है। मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे कुछ लोग बैरिकेडिंग हटाकर निदेशालय परिसर में प्रवेश कर गए थे। इसके बाद परिसर में तोड़फोड़ और कर्मचारियों से अभद्रता के आरोप भी लगे। शिक्षा निदेशालय के केयरटेकर की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में लगभग 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले से संबंधित सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। हालांकि, आरोपों की जांच जारी है और दोषियों की पहचान तथा उनकी भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।
एफआईआर दर्ज होने से आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि प्रशासन को उनकी मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। बुधवार को भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय परिसर में धरने पर बैठे रहे। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण निदेशालय के कार्यालयों में सामान्य कामकाज भी प्रभावित हुआ। कई कार्यालय बंद रहे और कर्मचारी भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखाई दिए।
प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उन्हें निर्धारित धरनास्थल पर जाने की सलाह दी थी। हालांकि, अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों पर लिखित निर्णय मिलने तक शिक्षा निदेशालय से हटने से इनकार कर दिया। गुरुवार को आंदोलन चौथे दिन भी जारी रहा और छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।
समाजवादी पार्टी के नेताओं का धरनास्थल पर पहुंचना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में रोजगार और शिक्षक भर्ती का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। विपक्षी दल भर्ती परीक्षाओं, युवाओं की बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों से जुड़े मुद्दों पर लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। इसी क्रम में श्यामलाल पाल ने प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
वहीं, भर्ती प्रक्रिया से संबंधित विवाद का समाधान संबंधित विभाग और सक्षम अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगा। छात्रों की मांगों के समर्थन में राजनीतिक दलों के आने से मामले की चर्चा बढ़ी है, लेकिन अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि उन्हें पुरानी नियमावली के तहत परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा या नहीं।
फिलहाल प्रयागराज में शिक्षा निदेशालय के सामने प्रतियोगी छात्रों का धरना जारी है। छात्रों का कहना है कि वे अपने भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने आंदोलन को समर्थन देकर प्रदेश सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने का प्रयास किया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और शिक्षा विभाग अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और यह आंदोलन कब समाप्त होता है।
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