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यमुना सफाई पर मनोज तिवारी का बड़ा बयान, डेढ़ साल में 30 KM साफ करने का दावा

Ratna Netam
29 Oct 2026 5:58 PM IST
यमुना सफाई पर मनोज तिवारी का बड़ा बयान, डेढ़ साल में 30 KM साफ करने का दावा
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया है कि पिछले डेढ़ साल में यमुना नदी के लगभग 30 किलोमीटर हिस्से की सफाई की गई है। उनके इस बयान के बाद राजधानी में यमुना की स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण और नदी के पुनर्जीवन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, 30 किलोमीटर हिस्से की सफाई संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि करने वाला विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी लगातार यमुना की सफाई को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को भी चुनौती दी है। तिवारी का कहना है कि यमुना की वास्तविक स्थिति जानने के लिए राजनीतिक दलों को नदी के किनारे जाकर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए। उन्होंने विपक्षी नेताओं को 29 अक्टूबर को सोनिया विहार पहुंचकर सफाई कार्यों का निरीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया था।
दरअसल, यमुना की सफाई को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब 18 अक्टूबर को मनोज तिवारी ने नदी के पानी से मुंह धोने और जल ग्रहण करने का वीडियो साझा किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके वीडियो को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने यमुना के प्रदूषण और पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए।इन प्रतिक्रियाओं के बाद तिवारी ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया पर वीडियो और मीम बनाने के बजाय यमुना के किनारे आकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने यमुना की सफाई पर खुली चर्चा करने की भी बात कही।
भाजपा सांसद ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन से जुड़ी हुई है। उन्होंने लोगों से नदी में प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य कचरा नहीं डालने की अपील की। उनका कहना था कि नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी जरूरी है।इससे पहले 18 अक्टूबर को आयोजित यमुना नदी तट स्वच्छता अभियान में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा के कई सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। अभियान के दौरान नदी के किनारों से कचरा हटाने और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।
दिल्ली सरकार भी यमुना की सफाई को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। सरकार के अनुसार, नदी में गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकने, पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता बढ़ाने और नए संयंत्र स्थापित करने पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न कॉलोनियों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी जोर दिया जा रहा है।दिल्ली सरकार ने अगले ढाई वर्षों में यमुना की स्थिति में व्यापक सुधार लाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत पुराने 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को अपग्रेड करने और नए संयंत्रों के निर्माण जैसे कार्य प्रस्तावित तथा प्रगति पर बताए गए हैं। सरकार का मानना है कि जब तक घरों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी को उपचारित करके नदी में नहीं छोड़ा जाएगा, तब तक यमुना को स्थायी रूप से स्वच्छ बनाना मुश्किल होगा।इसी बीच दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने भी यमुना की स्थिति को लेकर दावा किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में यमुना के लगभग 52 किलोमीटर हिस्से में झाग की समस्या नहीं है। हालांकि, नदी में झाग दिखाई नहीं देना अपने आप में पानी के प्रदूषण मुक्त होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए पानी में घुलित ऑक्सीजन, जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग और अन्य प्रदूषकों की जांच जरूरी होती है।
यमुना की सफाई का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली में नदी लंबे समय से घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों से आने वाले प्रदूषित पानी की समस्या से प्रभावित रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, केवल नदी की सतह और किनारों से कचरा हटाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना, सीवेज उपचार व्यवस्था मजबूत करना और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना भी आवश्यक है।दूसरी ओर, विपक्ष लगातार यमुना की सफाई के दावों पर सवाल उठाता रहा है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि नदी की वास्तविक स्वच्छता का आकलन राजनीतिक बयानों के बजाय वैज्ञानिक परीक्षणों और सार्वजनिक किए गए आंकड़ों से होना चाहिए।
यमुना की सफाई का सीधा संबंध छठ पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों से भी है। दिल्ली में बड़ी संख्या में पूर्वांचल के लोग यमुना के घाटों पर छठ पूजा करते हैं। ऐसे में नदी के पानी की गुणवत्ता, घाटों की सफाई और श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। सरकार ने इस बार घाटों पर बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की बात कही है।फिलहाल मनोज तिवारी का डेढ़ साल में 30 किलोमीटर यमुना साफ करने का दावा चर्चा का विषय बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नदी के अलग-अलग हिस्सों की जल गुणवत्ता के आधिकारिक आंकड़ों में कितना सुधार दर्ज होता है। यमुना की सफाई के प्रयासों की वास्तविक सफलता का आकलन नियमित वैज्ञानिक जांच, प्रदूषण में कमी और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में स्थायी सुधार से ही किया जा सकेगा।
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