उत्तर प्रदेश

श्रद्धा दुबे को जेल से राहत नहीं, जमानत अर्जी खारिज

Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 5:06 PM IST
श्रद्धा दुबे को जेल से राहत नहीं, जमानत अर्जी खारिज
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने तीनों को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। आरोपियों की ओर से न्यायिक रिमांड का विरोध करते हुए दाखिल अर्जी भी अदालत ने खारिज कर दी। इस फैसले के बाद तीनों को 31 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहना होगा, जब तक किसी सक्षम अदालत से राहत नहीं मिलती।
प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोपियों के वकील ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का विरोध किया था। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। उपलब्ध अदालती कार्यवाही की रिपोर्टों के अनुसार, यह आदेश न्यायिक रिमांड का विरोध करने वाली अर्जी से संबंधित था। अलग से नियमित जमानत याचिका खारिज होने और न्यायिक अधिकारी का नाम आलोक वर्मा होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए तीनों आरोपी
शिवा शर्मा की मौत के मामले में गिरफ्तार श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश को 22 अक्टूबर को लखनऊ की अदालत में पेश किया गया था।इससे पहले पुलिस ने तीनों से कई घंटों तक पूछताछ की। इसके बाद उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और अदालत के समक्ष पेश किया गया।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने न्यायिक रिमांड स्वीकृत नहीं करने की मांग की, लेकिन अदालत ने अर्जी खारिज कर दी।इसके बाद तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब मामले से जुड़े डिजिटल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
9 अक्टूबर को हुई थी कारोबारी शिवा शर्मा की मौत
यह पूरा मामला 9 अक्टूबर 2026 का है। लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हो गई थी।शिवा शर्मा कैफे और अन्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़े हुए थे। घटना के बाद उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे।पुलिस के अनुसार, शिवा अपार्टमेंट के जिस फ्लैट में मौजूद थे, वहां मॉडल श्रद्धा दुबे रहती थीं। दोनों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप होने की बात भी जांच में सामने आई है।परिजनों ने शिवा की मौत को दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए हत्या का आरोप लगाया था। इसके बाद हजरतगंज पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
शिवा शर्मा की मौत के बाद उनकी मां रंजना शर्मा ने पुलिस को शिकायत दी थी।परिवार का आरोप है कि शिवा की हत्या करके उन्हें अपार्टमेंट से नीचे फेंका गया। हालांकि, यह आरोप अभी न्यायालय में साबित नहीं हुआ है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शिवा के शरीर पर 11 चोटों का उल्लेख होने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये चोटें ऊंचाई से गिरने के कारण आई थीं या घटना से पहले किसी तरह की हिंसा हुई थी।मौत की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नागपुर से गिरफ्तार किए गए थे तीनों
घटना के बाद श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और चालक दानिश की तलाश शुरू की गई थी।पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी प्राप्त किया था।इसके बाद लखनऊ पुलिस, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स और महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त टीम ने 20 अक्टूबर को नागपुर से तीनों को गिरफ्तार किया।पुलिस के अनुसार, आरोपी नागपुर के एक अपार्टमेंट में रह रहे थे।गिरफ्तारी के बाद तीनों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उत्तर प्रदेश पुलिस को ट्रांजिट रिमांड मिली। इसके बाद पुलिस उन्हें सड़क मार्ग से लखनऊ लेकर आई।
पुलिस ने पूछे 120 सवाल
लखनऊ पहुंचने के बाद पुलिस ने श्रद्धा दुबे और अन्य आरोपियों से लंबी पूछताछ की।रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ लगभग साढ़े छह घंटे चली और इस दौरान आरोपियों से करीब 120 सवाल किए गए।पुलिस ने शिवा शर्मा की मौत के दिन की घटनाओं, फ्लैट में मौजूद लोगों और घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों को लेकर जानकारी जुटाने का प्रयास किया।इसके अलावा पुलिस यह भी जानना चाहती है कि शिवा की मौत के बाद आरोपी लखनऊ से क्यों निकले और अलग-अलग स्थानों पर किसकी मदद से पहुंचे।पूछताछ के दौरान दिए गए जवाबों का मिलान उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है।
दो मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजे
जांच में पुलिस का विशेष ध्यान मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों पर है।रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने श्रद्धा और दानिश से जुड़े दो मोबाइल फोन सील करके फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजे हैं।जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट किए गए हो सकते हैं।फोरेंसिक विशेषज्ञ इन उपकरणों से संबंधित डेटा रिकवर करने की कोशिश करेंगे।मोबाइल फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, संदेश और अन्य डिजिटल जानकारी से घटना के दिन तथा उसके बाद की गतिविधियों के बारे में सुराग मिलने की उम्मीद है।हालांकि, डिलीट किए गए संदेशों की वास्तविक सामग्री और उनसे अपराध का संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।
आरोपियों की मदद करने वालों की भी तलाशपुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपियों को लखनऊ से बाहर रहने के दौरान मदद पहुंचाई।जांच एजेंसियां आरोपियों की यात्रा, ठहरने के स्थानों और संपर्क में रहे व्यक्तियों से संबंधित जानकारी जुटा रही हैं।पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि तीनों किन परिस्थितियों में नागपुर पहुंचे और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उन्हें गिरफ्तारी से बचने में सहयोग किया।यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
श्रद्धा दुबे ने आरोपों से किया इनकार
इस मामले में श्रद्धा दुबे पहले भी खुद को निर्दोष बता चुकी हैं।उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए दावा किया था कि शिवा शर्मा आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों से गुजर रहे थे।हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।दूसरी ओर, शिवा के परिजन लगातार हत्या का आरोप लगाते रहे हैं।अब पुलिस के सामने दोनों पक्षों के दावों की जांच करके घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां स्थापित करने की चुनौती है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।बचाव पक्ष सक्षम अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं, जांच एजेंसी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त पूछताछ या अन्य जांच संबंधी अनुमति मांग सकती है।न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का अर्थ आरोपियों का दोषी साबित होना नहीं है। मामले में अपराध और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों तथा सुनवाई के आधार पर होगा।
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