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भारत किसी के आगे नहीं झुकेगा सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान
Ratna Netam
23 Oct 2026 4:51 PM IST

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नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अपनी गरिमा, आत्मसम्मान और स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखनी चाहिए। खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि कोई भी देश कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो या भारत को उसकी कितनी भी आवश्यकता क्यों न हो, भारत उसका अधीनस्थ अनुयायी नहीं बन सकता।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी ने विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कूटनीतिक संकेतों, परंपराओं और राष्ट्रीय सम्मान का विशेष महत्व होता है।
राहुल गांधी के बयानों का किया समर्थन
सलमान खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी ने अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों और कूटनीतिक व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।उन्होंने कहा कि विदेश नीति केवल नेताओं की बैठकों और आधिकारिक दौरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता भी शामिल होती है।खुर्शीद के मुताबिक, भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए दूसरे देशों के साथ संबंध बनाए रखने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि किसी शक्तिशाली देश के साथ अच्छे संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि भारत उसके दबाव में निर्णय ले।
अमेरिका के साथ संबंधों पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब राहुल गांधी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मुंबई में हुई मुलाकात को लेकर सरकार की आलोचना की थी।राहुल गांधी ने सवाल उठाया था कि अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलने के लिए जयशंकर को मुंबई क्यों जाना पड़ा। उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक स्थिति से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा था।हालांकि, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस आलोचना को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि विदेशी नेताओं के साथ राष्ट्रीय राजधानी के बाहर बैठक करना कोई असामान्य बात नहीं है।
व्यापार समझौते और एच-1बी वीजा का मुद्दा उठाया
सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार की विदेश नीति के परिणामों पर भी सवाल उठाए।उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता, एच-1बी वीजा संबंधी चिंताओं और भारतीय नागरिकों के निर्वासन का मुद्दा उठाया।खुर्शीद ने सवाल किया कि यदि भारत और अमेरिका के संबंध इतने मजबूत बताए जाते हैं, तो भारतीय नागरिकों तथा व्यापार से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं।एच-1बी वीजा भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका की वीजा नीतियों में बदलाव से वहां रोजगार की तलाश करने वाले भारतीय कर्मचारियों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों पर असर पड़ सकता है।
भारतीयों के निर्वासन पर जताई चिंता
पूर्व विदेश मंत्री ने अमेरिका से भारतीय नागरिकों को वापस भेजे जाने के तरीके पर भी सवाल उठाए।उन्होंने विशेष रूप से निर्वासित भारतीयों को हथकड़ी लगाकर वापस भेजे जाने का मुद्दा उठाते हुए इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय बताया।खुर्शीद के अनुसार, विदेश नीति की सफलता का आकलन केवल उच्चस्तरीय बैठकों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि विदेशों में भारतीय नागरिकों के हितों और सम्मान की कितनी प्रभावी तरीके से रक्षा की जाती है।उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई।
जयशंकर ने कांग्रेस की आलोचना का दिया जवाब
इस विवाद के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 अक्टूबर को एक कार्यक्रम में राहुल गांधी की आलोचना का जवाब दिया था।उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1972 में शिमला में पाकिस्तानी नेता जुल्फिकार अली भुट्टो से मुलाकात का उदाहरण दिया।जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा 2013 में जयपुर में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की मेजबानी का भी उल्लेख किया।उनका कहना था कि किसी विदेशी नेता से दूसरे शहर में मुलाकात करने को अधीनता या बुलावे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय हितों पर आधारित विदेश नीति की मांग
सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत को दुनिया के सभी महत्वपूर्ण देशों के साथ सहयोग बनाए रखना चाहिए, लेकिन अपनी स्वतंत्र पहचान और निर्णय लेने की क्षमता से समझौता नहीं करना चाहिए।इससे पहले भी कांग्रेस ने वैश्विक मंचों पर भारत की कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करने की मांग की थी। पार्टी ने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भरोसा और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।फिलहाल भारत की विदेश नीति को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच मतभेद सामने आए हैं। जहां सरकार अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और कूटनीतिक संपर्कों को महत्वपूर्ण बता रही है, वहीं विपक्ष इन संबंधों के व्यावहारिक परिणामों और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े सवाल उठा रहा है।
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