उत्तर प्रदेश

अफसरों के विवाद में 4 करोड़ का टेंडर सस्पेंड

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 6:20 PM IST
अफसरों के विवाद में 4 करोड़ का टेंडर सस्पेंड
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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में जिला पंचायत की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए निकाली गई करीब पौने चार करोड़ रुपये की निविदा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। टेंडर प्रक्रिया को लेकर जिला पंचायत के प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी (एएमए), इंजीनियर और प्रशासक के पति के बीच बंद कमरे में तीखी नोकझोंक होने की बात सामने आई है। विवाद के दौरान पिस्टल निकलने की भी चर्चा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनकी सुरक्षा में तीन सशस्त्र पुलिसकर्मियों को तैनात किए जाने की जानकारी है।
वहीं, प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने संबंधित टेंडर प्रक्रिया स्थगित कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद जिला पंचायत कार्यालय से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि विवाद के पीछे अपने-अपने करीबी ठेकेदारों को काम दिलाने को लेकर मतभेद हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
बंद कमरे में विवाद के बाद बढ़ा तनाव
जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत की विभिन्न सड़कों की मरम्मत और गड्ढामुक्ति के लिए करीब पौने चार करोड़ रुपये के कार्यों की निविदा प्रक्रिया चल रही थी। इसी प्रक्रिया को लेकर संबंधित अधिकारियों और प्रशासक पक्ष के बीच मतभेद पैदा हो गए।
बताया जा रहा है कि टेंडर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी, इंजीनियर और प्रशासक पति के बीच बंद कमरे में बहस शुरू हुई। कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि कार्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया।इस दौरान पिस्टल निकाले जाने की चर्चा ने मामले को और गंभीर बना दिया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर हथियार किसने निकाला और किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ। इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या प्राथमिकी सामने नहीं आई है।
टेंडर प्रक्रिया पर डीएम ने लगाई रोक
विवाद सामने आने के बाद प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी ने मामले की जानकारी जिलाधिकारी को दी। बताया गया है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने संबंधित निविदा प्रक्रिया स्थगित करने का निर्णय लिया।
प्रशासन के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामला सरकारी धन से होने वाले सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों से जुड़ा है। करीब पौने चार करोड़ रुपये की राशि से कई सड़कों को गड्ढामुक्त करने की योजना थी।टेंडर प्रक्रिया स्थगित होने के बाद अब संबंधित कार्यों के आगे बढ़ने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि निविदाओं की दोबारा जांच होगी या आवश्यक परीक्षण के बाद प्रक्रिया फिर शुरू की जाएगी।
गाजीपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जिला पंचायत की ई-निविदा सूचनाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, संबंधित विवाद और टेंडर स्थगन की अलग आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं मिली है।
अधिकारी की सुरक्षा में तीन सशस्त्र पुलिसकर्मी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी की सुरक्षा बढ़ाया जाना है। जानकारी के मुताबिक, उनकी सुरक्षा में तीन हथियारबंद पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि बंद कमरे में हुई कहासुनी सामान्य प्रशासनिक विवाद से कहीं अधिक गंभीर थी।हालांकि, सुरक्षा बढ़ाए जाने का अर्थ अपने आप में किसी पक्ष के विरुद्ध आरोप सिद्ध होना नहीं है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होंगे।फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि सुरक्षा व्यवस्था अस्थायी रूप से की गई है या आगे भी जारी रहेगी।
करीबी ठेकेदारों को काम दिलाने का आरोप
इस विवाद के पीछे ठेकेदारों के चयन को लेकर मतभेद होने की बात कही जा रही है। चर्चा है कि दोनों पक्ष अपने-अपने करीबी ठेकेदारों को काम दिलाना चाहते थे। इसी कारण निविदा प्रक्रिया को लेकर टकराव की स्थिति बनी।
हालांकि, अभी तक किसी ठेकेदार का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है। न ही इस बात की पुष्टि हुई है कि किसी विशेष व्यक्ति या फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए निविदा प्रक्रिया प्रभावित की जा रही थी।सरकारी निर्माण कार्यों में निविदा प्रक्रिया का उद्देश्य निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र ठेकेदारों का चयन करना होता है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर दबाव बनाकर टेंडर आवंटित कराने के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।जिला पंचायत से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि सड़क मरम्मत की गुणवत्ता और समयबद्धता का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर पड़ता है।
अब तक दर्ज नहीं हुई एफआईआर
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी की ओर से अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है।इस कारण विवाद के दौरान कथित तौर पर पिस्टल निकलने की चर्चा को फिलहाल पुष्ट घटना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। किसी आपराधिक घटना की पुष्टि के लिए औपचारिक शिकायत, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होगा।यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है, तो उसके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है।फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर टेंडर स्थगित किए जाने और अधिकारी की सुरक्षा बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
सड़कों की मरम्मत पर पड़ सकता है असर
करीब पौने चार करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया रुकने का असर सड़कों की मरम्मत पर भी पड़ सकता है। गड्ढामुक्ति का काम समय से पूरा नहीं होने पर ग्रामीणों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ सकती है।विशेषकर खराब सड़कों पर आवागमन करने वाले स्कूली बच्चों, किसानों और दैनिक यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन के सामने टेंडर से जुड़े विवाद का समाधान करने के साथ सड़क मरम्मत कार्यों को समय पर पूरा कराने की चुनौती भी रहेगी।अब सबकी नजर जिलाधिकारी के अगले फैसले पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित निविदा प्रक्रिया कब बहाल होती है और अधिकारी तथा प्रशासक पक्ष के बीच हुए विवाद की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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