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उत्तर प्रदेश
दीवाली से पहले प्रदूषण का रेड अलर्ट, हवा हुई खतरनाक
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 2:27 PM IST

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। शहर की हवा लगातार खराब होती जा रही है और कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। गुरुवार, 5 नवंबर की रात मेरठ का रियल टाइम AQI 462 दर्ज किया गया, जबकि गांधीनगर इलाके में यह आंकड़ा 485 तक पहुंच गया। प्रदूषण के इस स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हवा की धीमी रफ्तार और वातावरण में प्रदूषक कणों के जमा होने के कारण फिलहाल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।
मेरठ में पिछले कई दिनों से वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। दिन के समय हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई देती है, लेकिन शाम ढलने के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। रात के समय हवा की गति कम होने से धूल और धुएं के बारीक कण वातावरण में जमा हो जाते हैं। यही वजह है कि शहर के कई इलाकों में रात के समय AQI गंभीर श्रेणी में पहुंच रहा है।
गुरुवार रात सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मेरठ का औसत रियल टाइम AQI 462 दर्ज हुआ। वहीं, गांधीनगर में यह 485 तक पहुंच गया। भारतीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानकों के अनुसार, 401 से 500 के बीच AQI को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर की हवा स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है, जबकि पहले से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए खतरा अधिक होता है।शहर के अन्य इलाकों में भी प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक दिन पहले सामने आए आंकड़ों में मोदीपुरम का AQI 460, मेरठ कैंट का 449, कसेरुबक्सर का 454 और गांधीनगर का 470 दर्ज किया गया था। इससे स्पष्ट है कि प्रदूषण की समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है।
मेरठ में बढ़ते प्रदूषण के पीछे मौसम की परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट आ रही है। इसके साथ ही हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक तत्व तेजी से फैल नहीं पा रहे हैं।मौसम की ऐसी परिस्थितियों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्यों से उड़ने वाले कण और अन्य स्रोतों से होने वाला उत्सर्जन वातावरण में जमा होने लगता है। इससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है और AQI का स्तर बढ़ सकता है।
दिवाली से पहले प्रदूषण की मौजूदा स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाले धुएं के कारण हवा और खराब होने की आशंका है। यदि हवा की रफ्तार नहीं बढ़ती है, तो प्रदूषण के स्तर में तत्काल सुधार होना मुश्किल हो सकता है।मेरठ में वायु प्रदूषण की समस्या का असर आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। सड़कों पर धूल और धुएं के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर सुबह और रात के समय बाहर निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं। पीएम 2.5 के कण बेहद छोटे होते हैं और सांस के माध्यम से फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। लगातार इनके संपर्क में रहने से खांसी, गले में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर स्तर का प्रदूषण विशेष चिंता का विषय है। बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए प्रदूषित हवा उनके स्वास्थ्य को अधिक प्रभावित कर सकती है। इसी तरह बुजुर्गों और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर प्रदूषण की स्थिति में अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह देते हैं। विशेष रूप से सुबह और रात के समय खुले में व्यायाम करना नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को बाहर निकलना जरूरी हो, वे अच्छी तरह फिट होने वाला एन-95 मास्क इस्तेमाल कर सकते हैं।हालांकि, केवल मास्क पहनना ही प्रदूषण से बचाव का पूर्ण उपाय नहीं है। लोगों को घरों के भीतर धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से भी बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या लगातार खांसी की शिकायत हो रही है, तो उसे चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
दिवाली के त्योहार को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती और बढ़ गई है। बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ रही है। वाहनों की संख्या अधिक होने से व्यस्त सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों का उत्सर्जन भी बढ़ने की आशंका रहती है।प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों की धूल पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों को रोकना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग और अनावश्यक निजी वाहन यात्राओं को कम करना भी मददगार हो सकता है।
मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने की समस्या सामने आती रही है। इस समय वातावरण में मौजूद धूल और धुएं को फैलने के लिए पर्याप्त हवा नहीं मिलने से प्रदूषण का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।गुरुवार रात दर्ज किए गए आंकड़ों ने एक बार फिर शहर में स्वच्छ हवा की चुनौती को उजागर किया है। गांधीनगर में AQI 485 तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि संबंधित क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बेहद खराब थी। हालांकि, रियल टाइम AQI समय और निगरानी केंद्र के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए इन आंकड़ों को पूरे दिन के औसत प्रदूषण स्तर के समान नहीं समझना चाहिए।
फिलहाल मौसम की परिस्थितियों में बड़े बदलाव के बिना प्रदूषण से शीघ्र राहत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है। दिवाली के आसपास होने वाली गतिविधियों को देखते हुए लोगों को वायु गुणवत्ता की जानकारी पर नजर रखने और जरूरी सावधानियां अपनाने की आवश्यकता है।मेरठ में बढ़ते प्रदूषण ने त्योहार से पहले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार रात शहर का AQI 462 और गांधीनगर का 485 दर्ज होने से साफ है कि स्थिति गंभीर बनी हुई है। अब शहरवासियों को उम्मीद है कि हवा की रफ्तार बढ़ने और प्रदूषण नियंत्रण उपायों से आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
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