बिहार
मनेर एनकाउंटर के बाद बवाल, अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 2:21 PM IST

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पटना। बिहार की राजधानी पटना के मनेर में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 की सुबह पुलिस मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत के बाद दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ। पोस्टमार्टम के लिए तीनों के शव अस्पताल लाए गए थे। इसी दौरान मृतकों के परिजन बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने लगे। तनाव उस समय और बढ़ गया, जब परिजनों ने अस्पताल पहुंचे एक व्यक्ति को पकड़ लिया और उस पर पुलिस से मुखबिरी करने का आरोप लगाते हुए उसकी पिटाई शुरू कर दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद उस व्यक्ति को भीड़ से बचाया। घटना के कारण अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर गंगा घाट के पास शुक्रवार तड़के पुलिस और तीन संदिग्ध आरोपियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में तीनों को गोलियां लगीं। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया।मृतकों की पहचान दानापुर थाना क्षेत्र के न्यू ताराचक निवासी जेपी यादव, शाहपुर थाना क्षेत्र के गंगहारा निवासी राजेश शर्मा उर्फ राजा शर्मा और मनेर के सुअरमरवा निवासी बबलू कुमार के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि तीनों हत्या के एक मामले में वांछित थे और इनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि, मृतकों के परिजनों ने पुलिस के इन दावों पर सवाल उठाए हैं।
तीनों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार के सदस्य दानापुर अस्पताल पहुंचने लगे। अस्पताल परिसर में कुछ ही देर में लोगों की भीड़ जमा हो गई। परिजन अपने परिवार के सदस्यों के शव देखने की मांग कर रहे थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और मृतकों के रिश्तेदारों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।हंगामे के बीच परिजन एंबुलेंस तक पहुंच गए और शवों को दिखाने की मांग करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन नाराज लोग अपनी मांग पर अड़े रहे। तनाव के कारण तीनों शव काफी देर तक एंबुलेंस में ही रखे रहे।
इसी बीच अस्पताल परिसर में मौजूद एक व्यक्ति को देखकर कुछ परिजन अचानक भड़क गए। उन्होंने उस व्यक्ति पर आरोप लगाया कि उसी ने पुलिस को तीनों के बारे में सूचना दी थी। परिजनों को संदेह था कि उसकी मुखबिरी के कारण पुलिस ने मुठभेड़ की कार्रवाई की।आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी। अचानक हुई मारपीट से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तत्काल बीच-बचाव करने पहुंचे। काफी प्रयास के बाद पुलिस ने व्यक्ति को भीड़ के कब्जे से छुड़ाया। हालांकि, उस व्यक्ति के मुखबिर होने के आरोप की कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
अस्पताल में बढ़ते तनाव की सूचना मिलने के बाद एसडीपीओ अजीत कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने नाराज परिजनों को शांत कराने और स्थिति संभालने का प्रयास किया। इसके बावजूद परिवार के सदस्य पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे।परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने मुठभेड़ के नाम पर तीनों की हत्या की है। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। दूसरी ओर पुलिस ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि आरोपियों की ओर से गोलीबारी किए जाने के बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई थी।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा के अनुसार, शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े चार बजे पुलिस को मनेर इलाके में संदिग्ध आरोपियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पटना पुलिस और विशेष कार्य बल की संयुक्त टीम शेरपुर गंगा घाट के आसपास पहुंची।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की थी। इसी दौरान आरोपियों की ओर से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी गई। जवाब में पुलिसकर्मियों ने भी गोलियां चलाईं।
पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगभग 20 मिनट तक गोलीबारी हुई। आरोपियों की ओर से करीब 24 राउंड फायरिंग की गई, जबकि पुलिस ने जवाब में लगभग 18 राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान मनेर थानाध्यक्ष रजनीश कुमार भी घायल हो गए।बताया गया कि गोली थानाध्यक्ष की बांह को छूते हुए निकल गई। घायल थानाध्यक्ष को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद तीनों आरोपियों को भी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपी मनेर में पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार उर्फ भोलू की हत्या के मामले में वांछित थे। यह हत्या अक्टूबर महीने में हुई थी। पुलिस को मामले से जुड़े आरोपियों की तलाश थी।जांच एजेंसियों का दावा है कि शेरपुर गंगा घाट के पास तीनों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की गई। घटनास्थल से दो पिस्तौल, एक देसी कट्टा और कई कारतूस बरामद होने की बात भी सामने आई है।
मुठभेड़ के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने गोलीबारी से संबंधित साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ की परिस्थितियों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जा रही हैवहीं, मृतक जेपी यादव के भाई रामाशीष यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड में उनके भाई का नाम नहीं था। राजेश शर्मा के भाई ने भी बताया कि गुरुवार शाम को उनकी राजेश से बातचीत हुई थी।
परिजनों के इन बयानों के बाद मुठभेड़ को लेकर विवाद बढ़ गया है। परिवार के सदस्यों ने पुलिस के दावों को चुनौती देते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीनों शवों का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ कराया जाना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच से मौत की परिस्थितियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकेंगे। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
फिलहाल मनेर में हुई मुठभेड़ और उसके बाद दानापुर अस्पताल में हुए हंगामे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस इसे अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिजन मुठभेड़ पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।अस्पताल में मुखबिरी के शक में एक व्यक्ति की पिटाई की घटना ने भी मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब पुलिस के सामने मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच के साथ अस्पताल परिसर में हुई मारपीट के घटनाक्रम की पड़ताल करने की चुनौती है।
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