उत्तर प्रदेश

Mathura: नंद गांव में होली की धूम, मान्यता के अनुसार कृष्ण और राधा रानी ने खेली थी होली

Sarita
10 March 2025 9:06 AM IST
Mathura: नंद गांव में होली की धूम, मान्यता के अनुसार कृष्ण और राधा रानी ने खेली थी होली
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Mathura मथुरा: मथुरा के नंद गांव में रविवार को रंगों और लट्ठों से होली मनाई गई। यह आयोजन बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली के दूसरे दिन हुआ, जहां नंद गांव के नंद भवन में विशेष रूप से होली खेली गई। इस दौरान भगवान कृष्ण और राधा रानी के बीच होली खेलने की विशेष धार्मिक मान्यता के तहत इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है।
बरसाना में लट्ठमार होली-
धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन मास की नवमी को राधारानी के धाम बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाती है और अगले दिन नंदगांव से कृष्ण के सखा होली खेलने आते हैं। यह ऐसा अवसर होता है जब राधा रानी अपनी सखियों के साथ नंदगांव पहुंचती हैं और भगवान कृष्ण से होली खेलने का आग्रह करती हैं। इस अवसर पर भगवान कृष्ण गोपी रूप में और राधा रानी ब्रज गोप रूप में होली खेलती हैं।
हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने लिया हिस्सा-
लट्ठमार होली का यह अनूठा रूप धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां पुरुष महिलाओं की भूमिका में नजर आते हैं। इस खेल में महिलाएं पुरुषों पर लट्ठ बरसाती हैं और पुरुष उनकी रक्षा करते हैं। यह एक विशेष प्रकार का खेल है, जिसमें भक्ति और आस्था शामिल होती है। नंद गांव में आयोजित इस होली आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने हिस्सा लिया। रंगों की बौछार के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान कृष्ण और राधा रानी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
लोग उत्साह से भरे रहे-
इसके साथ ही नंद गांव में भी यह दिन भक्ति और उल्लास से भरा रहा, जहां लोग एक दूसरे को रंग लगाकर आनंद उठा रहे थे। लट्ठमार होली की इस परंपरा को लेकर स्थानीय लोग और पर्यटक काफी उत्साहित रहते हैं और यह आयोजन हर साल मथुरा की धार्मिक संस्कृति का अभिन्न अंग बन गया है।
राधा रानी अपनी सखियों के साथ नंद गांव आती हैं-
डॉ. हरिमोहन गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव की होली पिछले पांच हजार वर्षों से चली आ रही है और यह ब्रज की अनूठी परंपरा है। होलाष्टक शुरू होने पर बरसाना में राधा रानी के स्थान से होली की शुरुआत होती है, लट्ठमार होली और रंगोली के बाद ब्रज की पुरानी परंपरा के अनुसार फगुआ दिया जाता है इस परंपरा के अनुसार राधा रानी बरसाना से अपनी सखियों के साथ नंदगांव आती हैं। बाराती की तरह होता है स्वागत- उन्होंने आगे बताया कि गोस्वामी समाज के ये लोग देखने में बच्चे या गोप जैसे लगते हैं, लेकिन दिल से ये सभी राधा रानी की गोपियां हैं, जो किशोरी जी का झंडा लेकर नंदलाला के साथ होली खेलने आती हैं। मंदिर और महल में समाज गायन और रंग होली होती है। यशोदा कुंड पर ऐसा आतिथ्य सत्कार किया जाता है, मानो घर में कोई मेहमान आया हो। जब नंदगांव से लोग बरसाना जाते हैं, तो वहां उनका बारात की तरह स्वागत किया जाता है। जब बरसाना से लोग नंदगांव आते हैं, तो उन्हें यशोदा कुंड पर भांग, धनिया, दूध, पकौड़े आदि खिलाए जाते हैं। इसके बाद मंदिर के नीचे गलियों में सखियों के साथ लट्ठमार होली और रंगोली खेली जाती है।
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