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उत्तर प्रदेश
काशी में चक्रवात अर्णब का असर, बारिश में भी जारी रही गंगा आरती
Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 8:06 PM IST

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वाराणसी। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्णब' का असर गुरुवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में देखने को मिला। सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे और रुक-रुककर हुई बारिश ने शहर के मौसम का मिजाज बदल दिया। तेज हवाओं और बारिश के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। सड़कों पर जलजमाव से लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, खराब मौसम का काशी की विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की आरती पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। बारिश और तेज हवाओं के बीच भी श्रद्धालुओं की आस्था बनी रही और गंगा घाटों पर धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं।
गुरुवार सुबह से ही वाराणसी में मौसम बदला हुआ नजर आया। आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच सुबह से बूंदाबांदी शुरू हो गई। दिन चढ़ने के साथ कई क्षेत्रों में बारिश तेज हो गई। इसके कारण रोजमर्रा के कामकाज के लिए घरों से निकलने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़कों पर पानी जमा होने से वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ीं। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों को परेशानी हुई।
मौसम विभाग ने पहले ही चक्रवात अर्णब के प्रभाव से वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की थी। गुरुवार को यह पूर्वानुमान सही साबित हुआ। वाराणसी के अलावा सोनभद्र, बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही और चंदौली में भी बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।
बारिश का असर शहर के प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी दिखाई दिया। मौसम खराब होने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित रही। कई जगहों पर दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ गई, जिससे वाहन चालकों को अधिक सावधानी बरतनी पड़ी।
हालांकि, इन सभी परेशानियों के बीच काशी की धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था पर मौसम का विशेष असर नहीं दिखाई दिया। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। बारिश और बूंदाबांदी के बावजूद श्रद्धालु सुबह से ही गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचते रहे। सामान्य दिनों की तुलना में कुछ घाटों पर रौनक कम जरूर दिखाई दी, लेकिन धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं।
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली मां गंगा की आरती दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस आरती को देखने और इसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचते हैं। बारिश और तेज हवाओं के बावजूद गंगा आरती की परंपरा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह बना रहा। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, खराब मौसम के बीच भी आरती प्रभावित नहीं हुई।
काशी में मां गंगा की आरती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और दीपों की रोशनी से घाटों का वातावरण भक्तिमय हो उठता है। यही कारण है कि मौसम अनुकूल नहीं होने पर भी कई श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और आरती में शामिल होने की इच्छा रखते हैं।
दशाश्वमेध घाट के अलावा अस्सी घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर भी धार्मिक गतिविधियां आयोजित होती हैं। हालांकि, तेज बारिश और हवाओं के दौरान घाटों की सीढ़ियों पर फिसलन बढ़ सकती है। ऐसे में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। प्रशासन ने भी मौसम को देखते हुए लोगों से सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
चक्रवात अर्णब के कारण बदले मौसम का प्रभाव केवल धार्मिक गतिविधियों या सड़क यातायात तक सीमित नहीं है। इसका असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है। पूर्वांचल में इस समय कई स्थानों पर धान की फसल तैयार हो रही है। तेज हवा और बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में धान की फसल जमीन पर गिरने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा सर्दियों की सब्जियों की खेती भी प्रभावित हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के लिए तैयार धान की फसल पर लगातार बारिश पड़ने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। खेतों में पानी जमा रहने से कटाई में देरी हो सकती है। वहीं, तेज हवाओं के कारण फसल गिरने से किसानों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है। हालांकि, फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन संबंधित विभागों के सर्वेक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्णब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन इसके अवशेषों से जुड़े बादलों और नमी के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। वाराणसी और आसपास के जिलों में 29 तथा 30 अक्टूबर को बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना व्यक्त की गई है। कुछ स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की चेतावनी भी जारी की गई है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े नहीं होने तथा जलभराव वाले रास्तों पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गंगा घाटों और नदी किनारे जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मौसम की स्थिति के अनुसार सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
गुरुवार को वाराणसी में बारिश और तेज हवाओं ने जहां सामान्य जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी, वहीं मां गंगा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बनी रही। मौसम की चुनौतियों के बीच भी काशी की धार्मिक पहचान और परंपराओं की झलक दिखाई दी।
फिलहाल मौसम विभाग और जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में बारिश की तीव्रता और हवाओं की स्थिति के आधार पर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। दूसरी ओर, चक्रवात अर्णब के प्रभाव से हुई बारिश ने एक बार फिर यह दिखाया कि प्राकृतिक परिस्थितियां जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन काशी में मां गंगा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का विशेष महत्व बना हुआ है।
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