विश्व
एर्दोगन ने ट्रम्प को किया फोन, तीन बड़े संकटों पर हुई अहम बातचीत
Ratna Netam
29 Oct 2026 8:01 PM IST

x
अंकारा। तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की है। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, यमन संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। एर्दोगन ने इन संघर्षों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू कराने में तुर्किये की ओर से सहयोग देने की पेशकश भी की।र्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार निदेशालय द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, एर्दोगन और ट्रम्प ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों की समीक्षा की। बातचीत के दौरान एर्दोगन ने स्पष्ट किया कि उनका देश क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा।
एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया कि तुर्किये, मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के अंतर्गत सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य तथा यमन की परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से निकालने की दिशा में काम किया जा रहा है।होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस आपूर्ति के लिए प्रमुख रास्तों में शामिल है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से समुद्री परिवहन, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। तुर्किये का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संबंधित देशों के बीच संवाद बनाए रखना आवश्यक है।इससे पहले भी तुर्किये ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रखने का समर्थन किया था। अगस्त 2026 में एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से संपर्क करके तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाने का आग्रह किया था। उन्होंने उस समय भी शांति प्रयासों में सहयोग देने की बात कही थी।
यमन संकट पर भी दोनों नेताओं की बातचीत महत्वपूर्ण रही। यमन लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, सशस्त्र संघर्ष और मानवीय संकट का सामना कर रहा है। हालिया घटनाक्रम में यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हुई हैं।मक्का संयुक्त रक्षा समझौते से जुड़े सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने 26 अक्टूबर को ईरान के नेतृत्व के साथ तेहरान में बातचीत की थी। इस बैठक में क्षेत्रीय तनाव कम करने, होर्मुज में समुद्री गतिविधियों को सामान्य बनाने और हूती हमलों को रोकने जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। अधिकारियों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी।
हालांकि, तुर्किये में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की संसदीय अनुमोदन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। तुर्किये की संसदीय विदेश मामलों की समिति ने समझौते को मंजूरी दे दी है, लेकिन अंतिम अनुमोदन के लिए इसे पूर्ण संसद से पारित होना आवश्यक है। इस समझौते में सुरक्षा सहयोग, रक्षा उत्पादन और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसे प्रावधान शामिल हैंएर्दोगन और ट्रम्प की बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध भी प्रमुख मुद्दा रहा। तुर्किये के राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश रूस और यूक्रेन के बीच रुकी हुई कूटनीतिक प्रक्रिया को फिर सक्रिय करने में योगदान देने के लिए तैयार है।
एर्दोगन ने जोर दिया कि युद्ध समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाना जरूरी है। तुर्किये पहले भी रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता के प्रयासों में शामिल रहा है। अंकारा ने दोनों देशों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति अपनाई है और युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता रहा है।रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से व्यापक युद्ध जारी है। इस संघर्ष ने यूरोपीय सुरक्षा, वैश्विक खाद्य आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम और स्थायी शांति समझौते के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने 23 अक्टूबर को बताया था कि यूक्रेन, रूस और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच नवंबर के पहले पखवाड़े में अबू धाबी में तकनीकी स्तर की शांति वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी है। हालांकि, इन वार्ताओं की सफलता और किसी संभावित समझौते की शर्तों को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।एर्दोगन का नया प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं। तुर्किये ने संकेत दिया है कि वह बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने को तैयार है। हालांकि, 28 अक्टूबर की फोन वार्ता के बाद किसी नई मध्यस्थता बैठक की तारीख घोषित नहीं की गई है।
दोनों राष्ट्रपतियों के बीच तुर्किये और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई। एर्दोगन ने कहा कि उनका देश वाशिंगटन के साथ सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने व्यापार, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।तुर्किये के राष्ट्रपति ने इस बात का भी उल्लेख किया कि अगले वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 100वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस अवसर को द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एर्दोगन और तुर्किये की जनता को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। तुर्किये में प्रत्येक वर्ष 29 अक्टूबर को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। ट्रम्प ने तुर्किक राज्यों के संगठन के आगामी शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए भी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।फिलहाल एर्दोगन और ट्रम्प की फोन वार्ता में तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कूटनीति को प्राथमिकता देने का संदेश सामने आया है। तुर्किये ने होर्मुज और यमन में तनाव कम करने के प्रयास जारी रखने तथा रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए संवाद बहाल करने में सहयोग देने की बात कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रस्तावों पर संबंधित देशों के बीच आगे किस प्रकार के कूटनीतिक कदम उठाए जाते हैं।
Next Story





