- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- डेंगू का कहर, एक दिन...
उत्तर प्रदेश
डेंगू का कहर, एक दिन में 30 नए मरीज मिले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 8:00 PM IST

x
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को जिले में एक ही दिन में 30 नए मरीजों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। इस सीजन में एक दिन के भीतर सामने आए मरीजों की यह सर्वाधिक संख्या बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में 19 और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की जांच में 11 मरीज संक्रमित पाए गए हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और मच्छरों की रोकथाम से जुड़े उपायों को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
गुरुवार को सामने आई जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिले में डेंगू के 30 नए मामले दर्ज किए गए। इनमें से 19 मरीजों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर कराई गई जांच में हुई, जबकि 11 मरीजों की रिपोर्ट जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से पॉजिटिव आई। लगातार बढ़ रहे संक्रमण के बीच यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।
कानपुर में पिछले कुछ दिनों से डेंगू के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। इससे पहले भी शहर के अलग-अलग इलाकों में संक्रमित मरीज पाए गए थे। दो नवंबर को एक दिन में 21 मरीज मिलने की खबर सामने आई थी। इसके बाद भी नए मामलों का सिलसिला जारी रहा। अब गुरुवार को 30 मरीज मिलने से यह स्पष्ट है कि जिले में डेंगू संक्रमण की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे मच्छरों के पनपने की अनुकूल परिस्थितियां एक प्रमुख कारण हो सकती हैं। घरों के आसपास जमा पानी, खुले बर्तन, कूलर, पानी की टंकियां और अनुपयोगी वस्तुओं में जमा साफ पानी एडीज मच्छरों के प्रजनन का स्थान बन सकता है। यही मच्छर डेंगू वायरस के संक्रमण को फैलाते हैं। ऐसे में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उन्हें समाप्त करना बेहद जरूरी है।
शहर के कई इलाकों में पहले भी डेंगू संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें चकेरी, गांधीग्राम, अजीतगंज, नवाबगंज, श्याम नगर, जाजमऊ और चौबेपुर जैसे क्षेत्रों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा बाबूपुरवा, कल्याणपुर, गोविंदनगर, सिविल लाइंस और स्वरूपनगर में भी पिछले दिनों डेंगू के मामले दर्ज किए गए थे। अलग-अलग क्षेत्रों में संक्रमण की मौजूदगी को देखते हुए निगरानी का दायरा बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में बुखार के मरीजों की पहचान, जांच और मच्छर नियंत्रण से जुड़े अभियान चलाए जाते रहे हैं। इन अभियानों के अंतर्गत एंटी-लार्वा का छिड़काव, पानी जमा होने वाले स्थानों की जांच और लोगों को जागरूक करने जैसे कार्य शामिल हैं। गुरुवार को सामने आए मामलों के बाद इन प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता बढ़ गई है।डेंगू संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, बदन और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और शरीर पर लाल चकत्ते शामिल हो सकते हैं। हालांकि, सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ लोगों में संक्रमण हल्का रह सकता है, जबकि अन्य मरीजों में स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
चिकित्सकों के अनुसार, डेंगू के दौरान शरीर में पानी की कमी होने से परेशानी बढ़ सकती है। मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेने और आराम करने की जरूरत होती है। लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक सुस्ती अथवा सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए। ये गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत हो सकते हैं।डेंगू के इलाज में समय पर जांच और चिकित्सकीय निगरानी महत्वपूर्ण है। मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार के उपचार और अन्य दवाओं के लिए डॉक्टर की सलाह लेना सुरक्षित रहता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज जिले में डेंगू की जांच और उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थाओं में शामिल है। कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से 11 नए संक्रमित मरीजों की पुष्टि होने के बाद अस्पतालों और जांच केंद्रों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। मरीजों की समय पर पहचान से उपचार शुरू करने तथा संक्रमण की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है।डेंगू की रोकथाम के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। लोगों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। घरों में रखे पानी के बर्तनों को ढककर रखना, कूलर और अन्य पात्रों का पानी नियमित रूप से बदलना, छतों पर पड़े पुराने टायर तथा अनुपयोगी सामान को हटाना और आसपास पानी जमा नहीं होने देना मच्छरों की रोकथाम के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
एडीज मच्छर दिन के समय भी काट सकते हैं। इसलिए सुबह और शाम ही नहीं, दिन में भी मच्छरों से बचाव जरूरी है। पूरी बांह के कपड़े पहनना, आवश्यकतानुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना और घरों में जाली का इस्तेमाल करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में बुखार के लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यदि परिवार के किसी सदस्य में डेंगू की पुष्टि होती है, तो घर और आसपास मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना भी जरूरी है। इससे दूसरे लोगों को मच्छरों के काटने से बचाने में मदद मिल सकती है।
डेंगू की रोकथाम के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों, आवासीय कॉलोनियों और बाजारों में स्वच्छता बनाए रखने के साथ जलभराव को रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय से मच्छर नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाया जा सकता है।गुरुवार को 30 नए मरीज सामने आने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने संक्रमण की निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करने की चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, केवल एक दिन की अधिक संख्या से संक्रमण की पूरी स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए लगातार कई दिनों के आंकड़ों, जांच की संख्या और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति का विश्लेषण जरूरी होता है।
Next Story





