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मध्य प्रदेश
कार्तिक स्नान के दौरान बड़ा हादसा, क्वारी नदी में डूबने से तीन बच्चियों की मौत
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 7:49 PM IST

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मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में गुरुवार सुबह कार्तिक स्नान के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। जिले के कैलारस थाना क्षेत्र अंतर्गत सुहांस पंचायत के हरलाल का पुरा गांव में क्वारी नदी में नहाने गईं तीन नाबालिग बच्चियों की डूबने से मौत हो गई। मृतकों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं। धार्मिक आस्था के साथ नदी में स्नान करने पहुंची बच्चियों की अचानक मौत से पूरे गांव में मातम छा गया है। हादसे की जानकारी मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। घटना के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे तथा नदी में तलाश अभियान चलाकर तीनों बच्चियों के शव बाहर निकाले गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह हरलाल का पुरा गांव की तीन बच्चियां कार्तिक मास में स्नान करने के लिए गांव के पास बहने वाली क्वारी नदी पर गई थीं। तीनों बच्चियां नदी में स्नान कर रही थीं। इसी दौरान वे गहरे पानी की ओर चली गईं और डूबने लगीं। पानी की गहराई अधिक होने के कारण बच्चियां खुद को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल सकीं। देखते ही देखते तीनों पानी में समा गईं।
हादसे की सूचना मिलते ही गांव में अफरातफरी मच गई। ग्रामीण नदी किनारे पहुंचे और बच्चियों को तलाशने के प्रयास शुरू हुए। घटना की जानकारी कैलारस थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव कार्य के लिए संबंधित टीम को बुलाया गया। नदी में डूबी बच्चियों की तलाश के लिए अभियान चलाया गया।बचाव दल ने नदी में सर्चिंग शुरू की। काफी मशक्कत के बाद तीनों बच्चियों के शव पानी से बाहर निकाले गए। तीनों को बचाया नहीं जा सका। एक साथ तीन मासूम बच्चियों की मौत की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जिन घरों में सुबह तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां हादसे के बाद मातम पसर गया।
सामने आई जानकारी के अनुसार, मृतक बच्चियों की पहचान 12 वर्षीय प्राची यादव, 10 वर्षीय चंदा यादव और 12 वर्षीय निशि यादव के रूप में हुई है। प्राची और चंदा सगी बहनें थीं। तीनों बच्चियां हरलाल का पुरा गांव की रहने वाली थीं। दो सगी बहनों की एक ही हादसे में मौत होने से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में तीनों बच्चियों के पारिवारिक संबंधों को लेकर कुछ अंतर सामने आया है।घटना के संबंध में मुरैना के पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसा नदी में स्नान के दौरान हुआ। तीनों बच्चियां गहरे पानी में चली गई थीं। पुलिस ने घटना की जानकारी मिलने के बाद बचाव अभियान शुरू कराया। शव बरामद होने के बाद उन्हें कैलारस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोरकर रख दिया है। गांव में एक साथ तीन बच्चियों की मौत की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग प्रभावित परिवारों के घरों पर पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण भी घटना से स्तब्ध हैं। कार्तिक मास के दौरान धार्मिक आस्था के साथ स्नान करने गईं बच्चियों के साथ ऐसा हादसा होने से लोगों में गहरा दुख है।कार्तिक मास में नदी और अन्य जलस्रोतों में स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में श्रद्धालु सुबह के समय स्नान और पूजा-पाठ करते हैं। ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोग इस परंपरा का पालन करते हैं। हालांकि, नदी में पानी की गहराई, बहाव और नदी तल की स्थिति का सही अनुमान नहीं होने पर स्नान के दौरान दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
विशेष रूप से बच्चों के लिए नदी में स्नान करना जोखिम भरा हो सकता है। कई बार नदी किनारे पानी कम दिखाई देता है, लेकिन कुछ दूरी पर अचानक गहराई बढ़ जाती है। ऐसे में तैरना नहीं जानने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। मुरैना की इस घटना में भी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्चियों के गहरे पानी में चले जाने के कारण हादसा हुआ।इस दर्दनाक घटना के बाद नदी किनारे स्नान करने वालों की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे स्थान होते हैं, जहां लोग नियमित रूप से धार्मिक स्नान के लिए पहुंचते हैं। इन स्थानों पर गहरे पानी की चेतावनी देने वाले संकेतक, सुरक्षित स्नान स्थल और निगरानी जैसी व्यवस्थाएं दुर्घटनाओं को रोकने में उपयोगी हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों के लिए यह हादसा बेहद दुखद है। तीनों बच्चियां अपने परिवारों के साथ गांव में रहती थीं। गुरुवार सुबह हुई घटना ने उनके परिवारों की खुशियां छीन लीं। विशेष रूप से दो सगी बहनों को एक साथ खोने वाले परिवार का दुख शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। गांव के लोग प्रभावित परिवारों को सांत्वना दे रहे हैं।ऐसे हादसों को रोकने के लिए बच्चों को नदी, तालाब और अन्य गहरे जलस्रोतों में अकेले नहीं जाने देने की आवश्यकता है। धार्मिक आयोजनों और विशेष स्नान पर्वों के दौरान अभिभावकों तथा स्थानीय प्रशासन की सतर्कता महत्वपूर्ण होती है। नदी में पानी की स्थिति और सुरक्षित स्थानों की जानकारी होने से जोखिम को कम किया जा सकता है।
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