छत्तीसगढ़

CG BREAKING: गांव में धारदार हथियार लेकर ग्रामीणों पर टूट पड़ा युवक

Shantanu Roy
5 Nov 2026 7:53 PM IST
CG BREAKING: गांव में धारदार हथियार लेकर ग्रामीणों पर टूट पड़ा युवक
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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा हिंदी के एक सहायक प्राध्यापक के तबादले को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने उस तबादला आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता का स्थानांतरण एक ऐसे कॉलेज में कर दिया गया था जहाँ उस विषय का कोई पद ही रिक्त नहीं था। राज्य शासन के अधिवक्ता द्वारा इस प्रशासनिक चूक को स्वीकार किए जाने के बाद जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए 26 अक्टूबर 2026 के
स्थानांतरण आदेश
को रद्द कर दिया।

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता डॉ. बीरू लाल बरगाह वर्तमान में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय, सिमगा में हिंदी के सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को जारी एक आदेश के तहत उनका स्थानांतरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के भटगांव स्थित शासकीय राजमहंत नयन दास महालांग महाविद्यालय में कर दिया गया था। प्रशासनिक स्तर पर हुए इस मनमाने तबादला आदेश के खिलाफ डॉ. बीरू लाल बरगाह ने हाई कोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने रखे ये तर्क

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
पद की अनुपलब्धता: सिमगा स्थित महाविद्यालय में हिंदी सहायक प्राध्यापक का पद रिक्त था, जबकि जिस भटगांव कॉलेज में उनका तबादला किया गया, वहां पहले से ही डॉ. शुभा तिवारी पदस्थ हैं और वहां हिंदी विषय का कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है।

नीति का उल्लंघन: यह स्थानांतरण राज्य शासन की तय स्थानांतरण नीति के प्रावधानों और नियमों को ताक पर रखकर किया गया।

पारिवारिक व व्यक्तिगत कारण: शैक्षणिक सत्र के मध्य में हुए इस तबादले से याचिकाकर्ता के 11वीं कक्षा में पढ़ रहे बेटे की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, डॉ. बरगाह मधुमेह (डायबिटीज) से गंभीर रूप से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित चिकित्सीय देखभाल की आवश्यकता रहती है।

राज्य शासन ने कोर्ट में स्वीकार की अपनी गलती
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन के अधिवक्ता ने प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त निर्देशों का हवाला देते हुए कोर्ट के सामने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि भटगांव स्थित कॉलेज में हिंदी के सहायक प्राध्यापक का कोई पद उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले को सक्षम अधिकारियों के समक्ष पुनः विचार के लिए भेजने का अनुरोध किया।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और अंतिम फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि जिस शैक्षणिक संस्थान में पद ही उपलब्ध नहीं है, वहां किसी शिक्षक या प्राध्यापक का तबादला आदेश जारी किया जाना पूरी तरह से अनुचित और नियमविरुद्ध है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए 26 अक्टूबर 2026 को जारी तबादला आदेश को पूर्णतः निरस्त कर दिया।
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