उत्तर प्रदेश

चार साल की बच्ची से दरिंदगी, दोषी बंटी को उम्रकैद

Rajeshwari Nishad
9 Oct 2026 9:44 PM IST
चार साल की बच्ची से दरिंदगी, दोषी बंटी को उम्रकैद
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अमरोहा। चार साल की मूक-बधिर बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पोक्सो एक्ट प्रथम की अदालत ने दोषी बंटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। घटना के 10 महीने और आरोप तय होने के आठ महीने के भीतर यह फैसला आया है। बच्ची घटना के समय अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। अदालत ने अपराध की गंभीरता को रेखांकित करते हुए इसे समाज और नाबालिग बच्ची के प्रति गंभीर अपराध करार दिया।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने की। उन्होंने बताया कि घटना नौ दिसंबर 2025 को दोपहर बाद हुई थी। मामला रहरा थाना क्षेत्र का है। पीड़ित बच्ची की उम्र उस समय केवल चार साल थी और वह मूक-बधिर है। बच्ची की निजता तथा पहचान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके गांव, परिवार और घर से संबंधित विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। अदालत का फैसला इसी बच्ची के साथ हुए अपराध के मामले में सुनाया गया है।
घटना के संबंध में उपलब्ध विवरण के अनुसार बच्ची अपने घर के बाहर बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पोक्सो एक्ट प्रथम की अदालत में हुई। अदालत ने बंटी को अपराध का दोषी मानते हुए उम्रकैद और अर्थदंड की सजा दी है। फैसले में बच्ची की कम उम्र और उसकी स्थिति के संदर्भ में अपराध की गंभीरता का उल्लेख किया गया है। सजा के साथ लगाया गया जुर्माना 50 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।
इस मामले में फैसले तक पहुंचने की समयावधि भी महत्वपूर्ण है। घटना के लगभग 10 महीने के भीतर अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। वहीं आरोप बनने के बाद निर्णय आने में आठ महीने से कम समय लगा। घटना से फैसले तक का समय और आरोप तय होने के बाद की न्यायिक कार्यवाही की अवधि अलग-अलग हैं। उपलब्ध जानकारी में इन दोनों समयावधियों का उल्लेख किया गया है। इसलिए पूरे मामले की सुनवाई केवल आठ महीने में होने और घटना के 10 महीने के भीतर फैसला आने के बीच का अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है।
अदालत ने अपने निर्णय में इस घटना को केवल पीड़ित बच्ची के विरुद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा, बल्कि समाज के प्रति भी गंभीर अपराध बताया है। फैसले में नाबालिग बच्ची की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपराध की गंभीरता रेखांकित की गई। चार वर्ष की उम्र और सुनने-बोलने में असमर्थता इस मामले के महत्वपूर्ण तथ्य हैं। अदालत की टिप्पणी इसी संदर्भ में सामने आई है। उपलब्ध विवरण में उम्रकैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की पुष्टि की गई है, जबकि अन्य दंडात्मक शर्तों का विस्तृत उल्लेख नहीं दिया गया है।
विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए घटना की तारीख और समय की जानकारी दी है। उनके अनुसार नौ दिसंबर 2025 की दोपहर बाद यह अपराध हुआ था। न्यायिक निर्णय के बाद बंटी की स्थिति इस मामले में दोषी की है। खबर में उसके लिए दोषी शब्द का प्रयोग इसी आधार पर किया जा रहा है। वहीं बच्ची से जुड़े विवरण में उसकी पहचान गोपनीय रखी गई है। नाम, परिजनों की पहचान या ऐसा कोई स्थानीय संकेत शामिल नहीं किया गया है, जिससे उसके बारे में पहचान स्थापित हो सके।
इस फैसले का प्रमुख निष्कर्ष बंटी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया जाना है। उपलब्ध विवरण में जुर्माने की राशि बच्ची को दिए जाने, मुआवजे की अलग व्यवस्था या जुर्माना जमा नहीं करने पर अतिरिक्त सजा के संबंध में जानकारी नहीं है। इसलिए इन विषयों पर कोई दावा नहीं किया जा रहा है। इसी तरह उम्रकैद की अवधि के बारे में अदालत के विस्तृत आदेश से अलग कोई व्याख्या जोड़ना उचित नहीं होगा। निर्णय में बताई गई सजा को उसी रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
मामला एक अत्यंत कम उम्र की बच्ची के साथ हुए गंभीर अपराध से संबंधित है। ऐसी खबर में घटना की जानकारी देने के साथ पीड़िता की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। इसी कारण अपराध का अनावश्यक या विस्तृत वर्णन शामिल नहीं किया गया है। बच्ची की चिकित्सा स्थिति, वर्तमान स्वास्थ्य और परिवार की प्रतिक्रिया के संबंध में भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इन विषयों पर अनुमान लगाकर विवरण जोड़ने के बजाय अदालत के फैसले, अभियोजन के बयान और दी गई समयावधि तक खबर सीमित रखी गई है।
अभियोजन से मिली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि घटना दिसंबर 2025 में हुई और उसके बाद मामला विशेष पोक्सो अदालत तक पहुंचा। आरोप बनने के आठ महीने के भीतर निर्णय आया। हालांकि, उपलब्ध विवरण में मुकदमा दर्ज होने की तारीख, गिरफ्तारी का समय, आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख और गवाहों की संख्या का उल्लेख नहीं है। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया के इन चरणों के संबंध में अलग तथ्य नहीं जोड़े गए हैं। मामले में सामने आए निर्णय का केंद्र बच्ची के साथ अपराध की दोषसिद्धि और उसके लिए निर्धारित सजा है।
अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पोक्सो एक्ट प्रथम की अदालत का यह फैसला घटना के 10 महीने के भीतर आया है। अदालत ने चार साल की मूक-बधिर बच्ची से दुष्कर्म के दोषी बंटी को उम्रकैद की सजा देकर उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। निर्णय में अपराध को समाज और नाबालिग बच्ची के प्रति गंभीर बताया गया है। विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने घटना नौ दिसंबर 2025 की दोपहर बाद होने की जानकारी दी। पीड़ित बच्ची की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है।
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