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आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में BC को मिलेगा 34% आरक्षण TDP ने दोहराया वादा
Ratna Netam
9 Oct 2026 9:39 PM IST

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अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों और पिछड़े वर्गों (BC) के आरक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के खनन और आबकारी मंत्री कोल्लू रवींद्र ने शुक्रवार को स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) पर स्थानीय निकाय चुनावों में देरी करने और पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।मंगलगीरी स्थित टीडीपी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री कोल्लू रवींद्र ने कहा कि उनकी पार्टी पिछड़े वर्गों के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि टीडीपी ने अपने शासनकाल में पिछड़े वर्गों को स्थानीय प्रशासन में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।रवींद्र ने आरोप लगाया कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न कर रही है। उनके अनुसार, चुनावों में देरी होने से राज्य को मिलने वाले आवश्यक केंद्रीय फंड पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय निकायों में 34 प्रतिशत आरक्षण का वादा
मंत्री कोल्लू रवींद्र ने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने के अपने वादे पर कायम है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पिछड़े वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के मुद्दे को प्राथमिकता देती है।स्थानीय निकायों में आरक्षण का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों को पंचायतों और अन्य स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना है।रवींद्र ने कहा कि पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व मजबूत होने से स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।हालांकि, 34 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया और उसकी संवैधानिक वैधता संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा आवश्यक प्रक्रियाओं के अधीन होगी।
YSR कांग्रेस पार्टी पर लगाए आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोल्लू रवींद्र ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया में बाधा डाल रही है।रवींद्र के अनुसार, विपक्षी पार्टी के ऐसे प्रयासों से पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुंच सकता है।उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में देरी होने से राज्य को मिलने वाले केंद्रीय वित्तीय संसाधनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।हालांकि, मंत्री के इन आरोपों के संबंध में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।इसलिए इन आरोपों को मंत्री के राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
केंद्रीय फंड को लेकर भी उठाया मुद्दा
मंत्री कोल्लू रवींद्र ने स्थानीय निकाय चुनावों को राज्य के वित्तीय हितों से भी जोड़ा।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में बाधा उत्पन्न करने की कोशिशों से आंध्र प्रदेश आवश्यक केंद्रीय फंड से वंचित हो सकता है।स्थानीय निकायों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराया जाता हैइन संसाधनों का उपयोग स्थानीय बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाता है।हालांकि, मंत्री के बयान में किसी विशेष केंद्रीय योजना के तहत रोकी गई राशि या संभावित वित्तीय नुकसान का विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।ऐसे में केंद्रीय फंड पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में किसी निश्चित राशि का उल्लेख करना उचित नहीं होगा।
एनटी रामाराव के कार्यकाल का किया उल्लेख
कोल्लू रवींद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक नंदमुरी तारक रामाराव के कार्यकाल को भी याद किया।उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 में एनटी रामाराव ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की थी।रवींद्र ने इसे पिछड़े वर्गों को स्थानीय शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।उन्होंने कहा कि टीडीपी ने शुरुआत से ही पिछड़े वर्गों के राजनीतिक सशक्तीकरण को महत्व दिया है।मंत्री ने पार्टी की पिछली नीतियों का उल्लेख करते हुए वर्तमान आरक्षण संबंधी प्रतिबद्धता को उसी राजनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा बताया।
चंद्रबाबू नायडू ने बढ़ाया था आरक्षण
मंत्री कोल्लू रवींद्र ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के पिछले कार्यकाल का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में चंद्रबाबू नायडू ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण को बढ़ाकर लगभग 34 प्रतिशत कर दिया था।रवींद्र ने दावा किया कि इस निर्णय से पिछड़े वर्गों को स्थानीय राजनीतिक व्यवस्था में अधिक अवसर उपलब्ध हुए।उन्होंने कहा कि टीडीपी का वर्तमान लक्ष्य भी पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करना है।हालांकि, आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था में किसी भी बदलाव के लिए लागू कानूनों और न्यायिक निर्देशों का पालन आवश्यक होगा।
राजनीतिक और सामाजिक विकास पर जोर
कोल्लू रवींद्र ने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी ने पिछड़े वर्गों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम किया है।उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास को भी महत्वपूर्ण बताया।पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण का विषय केवल स्थानीय निकायों में आरक्षित पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी से भी जुड़ा है।मंत्री ने दावा किया कि टीडीपी की नीतियों का उद्देश्य इन क्षेत्रों में पिछड़े वर्गों के अवसर बढ़ाना रहा है।हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के उपलब्ध विवरण में इस संबंध में किसी नई योजना, बजट आवंटन या कार्यक्रम की घोषणा का उल्लेख नहीं है।
स्थानीय निकाय चुनावों पर राजनीतिक विवाद
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ टीडीपी और विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं।मंत्री कोल्लू रवींद्र ने चुनाव प्रक्रिया में कथित बाधाओं को पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व से जोड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।स्थानीय निकाय चुनावों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इनके माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है।ये प्रतिनिधि स्थानीय प्रशासन और विकास संबंधी निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की निश्चित तारीख या चुनाव कार्यक्रम का विवरण नहीं दिया गया है।
BC आरक्षण पर TDP का रुख स्पष्ट
मंगलगीरी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मंत्री कोल्लू रवींद्र ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने की टीडीपी की प्रतिबद्धता दोहराई।उन्होंने एनटी रामाराव और चंद्रबाबू नायडू के कार्यकाल में लिए गए आरक्षण संबंधी फैसलों का उल्लेख करते हुए पार्टी की पिछली नीतियों को सामने रखा।इसके साथ ही उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी पर स्थानीय निकाय चुनावों में देरी कराने और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
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