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उत्तर प्रदेश
अखिलेश यादव ने बृजभूषण के करीबियों को दिलाई सदस्यता
Rajeshwari Nishad
15 Oct 2026 5:14 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही समाजवादी पार्टी अपना कुनबा बढ़ाने में जुटी हुई है। इसी क्रम में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा और बहुजन समाज पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इनमें सबसे चर्चित नाम गोंडा के वरिष्ठ नेता भवानी भीख शुक्ला का रहा, जिन्होंने अपने पांच बेटों के साथ भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इसके अलावा कई पूर्व विधायक और अन्य राजनीतिक नेता भी सपा में शामिल हुए। इस मौके पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में कई नेताओं ने ली सदस्यता
गुरुवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में बड़ी राजनीतिक गतिविधि देखने को मिली। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अलग-अलग जिलों से आए नेताओं ने सपा की सदस्यता ग्रहण की।
कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नए सदस्यों का स्वागत किया।अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी का पीडीए परिवार लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न दलों से नेताओं का समाजवादी पार्टी में शामिल होना जनता के बीच बढ़ते समर्थन का संकेत है।उन्होंने नए नेताओं के पार्टी में आने पर खुशी जताई और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया।
पांच बेटों के साथ सपा में शामिल हुए भवानी भीख शुक्ला
इस सदस्यता कार्यक्रम में गोंडा जिले के वरिष्ठ नेता भवानी भीख शुक्ला सबसे अधिक चर्चा में रहे।भवानी भीख शुक्ला भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाते हैं। वह गोंडा के कटरा बाजार क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।गुरुवार को उन्होंने अपने पांच बेटों और अन्य परिजनों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।उनके पांच बेटों के नाम भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला हैं।इस दौरान पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने भवानी भीख शुक्ला और अखिलेश यादव के समर्थन में नारे लगाए।अखिलेश यादव ने शुक्ला परिवार का स्वागत करते हुए उनके राजनीतिक अनुभव की सराहना की।
पहले भी सपा में रह चुके हैं भवानी भीख शुक्ला
भवानी भीख शुक्ला का राजनीतिक सफर कई दलों से जुड़ा रहा है।उन्होंने वर्ष 1999 में भारतीय जनता पार्टी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 2009 से 2012 के बीच वह बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे।वर्ष 2012 से 2017 तक उन्होंने समाजवादी पार्टी में काम किया। इसके बाद 2017 में वह दोबारा भाजपा में लौट गए थे।अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी एक बार फिर समाजवादी पार्टी में वापसी हुई है।भवानी भीख शुक्ला लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनकी पत्नी जुगरानी भी कटरा बाजार की ब्लॉक प्रमुख हैं।उनके सपा में आने को गोंडा जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व विधायक समेत कई नेताओं ने बदला पाला
समाजवादी पार्टी में शामिल होने वालों में मुरादाबाद के पूर्व विधायक राजीव चन्ना का नाम भी शामिल है।इसके अलावा भाजपा से जुड़े रहे मनमोहन सैनी और योगेंद्र नाथ मिश्रा ने भी सपा की सदस्यता ली।
केशव पासी, आशीष प्रताप सिंह, नरेश प्रताप सिंह, लक्ष्मण सैनी, अंकित गौतम और चंद्रपाल सिंह सहित कई अन्य नेताओं के भी समाजवादी पार्टी में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।पूर्व केंद्रीय मंत्री वीपी मौर्य के पुत्र अक्षय मौर्य और बसपा में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा चुके योगेंद्र यादव तथा सुरेंद्र सैनी भी सपा में शामिल हुए।इन नेताओं के आने से समाजवादी पार्टी को विभिन्न जिलों में संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद है।अखिलेश यादव ने पीडीए को लेकर किया बड़ा दावाकार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति पर विशेष जोर दिया।
पीडीए का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। समाजवादी पार्टी इसी सामाजिक समीकरण के आधार पर उत्तर प्रदेश में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी का पीडीए परिवार लगातार बढ़ता जा रहा है।उन्होंने भाजपा पर समाज के विभिन्न वर्गों के साथ अन्याय और अपमान करने का आरोप लगाया।सपा प्रमुख ने दावा किया कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा।हालांकि, यह समाजवादी पार्टी का राजनीतिक दावा है। वास्तविक जनसमर्थन का आकलन चुनाव परिणामों से ही होगा।
भाजपा पर लगाए चुनावी गड़बड़ी के गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के आरोप भी लगाए।उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों में बड़ी संख्या में कथित फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं।सपा प्रमुख ने करीब 19 लाख संदिग्ध मतदाताओं का मामला सामने आने की बात कही।उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने लगभग 100 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची संबंधी शिकायतें उठाई हैं।अखिलेश यादव ने मतदान प्रक्रिया, मतगणना और विपक्षी दलों में तोड़फोड़ को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन्हें अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2027 के चुनाव को लेकर सपा की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में प्रस्तावित है।प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए प्रमुख राजनीतिक दल अभी से संगठनात्मक तैयारियों में जुटे हैं।समाजवादी पार्टी अपनी पीडीए रणनीति के साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी से जोड़ने पर ध्यान दे रही है।इसके अलावा कांग्रेस, बसपा और भाजपा भी अपने संगठन को मजबूत करने तथा सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही हैं।ऐसे में चुनाव से पहले नेताओं का एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
कांग्रेस और सपा के गठबंधन पर भी नजर
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 2024 का लोकसभा चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था।अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।हाल की राजनीतिक चर्चाओं में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के नेताओं की अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आई हैं।हालांकि, गठबंधन की अंतिम रणनीति और सीटों के बंटवारे के संबंध में आधिकारिक निर्णय होना अभी बाकी है।
भाजपा के सामने कितनी बड़ी चुनौती?
समाजवादी पार्टी में कई नेताओं के शामिल होने को भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।विशेष रूप से गोंडा के भवानी भीख शुक्ला और अन्य स्थानीय नेताओं के पार्टी बदलने से संबंधित क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि, किसी नेता के पार्टी बदलने से मतदाताओं का समर्थन भी उसी अनुपात में बदल जाएगा, यह जरूरी नहीं है।आगामी चुनाव में उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे, संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक गठबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यूपी की राजनीति में तेज हुई हलचल
गुरुवार को समाजवादी पार्टी में विभिन्न दलों के नेताओं के शामिल होने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।अखिलेश यादव इस घटनाक्रम को पीडीए परिवार के विस्तार और पार्टी की बढ़ती ताकत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।वहीं भाजपा, बसपा और अन्य राजनीतिक दल भी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
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