कर्नाटक
CM के फोन की जांच हो कुमारस्वामी की मांग से कर्नाटक की राजनीति गरमाई
Ratna Netam
15 Oct 2026 4:57 PM IST

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बेंगलुरु। कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार स्टिंग ऑपरेशन विवाद की निष्पक्ष जांच करने के बजाय जेडीएस कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है। कुमारस्वामी ने कैबिनेट बैठक की गोपनीय जानकारी मीडिया तक पहुंचने पर भी सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री के फोन की जांच की मांग की।कुमारस्वामी ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना चाहती है, तो उसे जांच का दायरा बढ़ाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि कैबिनेट की गोपनीय बातचीत आखिर मीडिया तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।
कैबिनेट की गोपनीय जानकारी लीक होने पर उठाए सवाल
मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से कई सवाल पूछे।उन्होंने कहा, "कैबिनेट बैठक की जानकारी मीडिया को किसने दी? कैबिनेट की गोपनीय बातें मीडिया को किसने लीक कीं?"कुमारस्वामी ने कहा कि इस मामले में केवल विपक्षी नेताओं या उनके कार्यकर्ताओं पर संदेह करने के बजाय सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।उन्होंने मुख्यमंत्री के फोन की जांच की मांग करते हुए कहा कि गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने की परिस्थितियों का पता लगाया जाना जरूरी है।
जेडीएस कार्यकर्ताओं को परेशान करने का आरोप
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े मामले में उनकी पार्टी के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि जेडीएस सोशल मीडिया टीम के सदस्य शंकर को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि एक अन्य कार्यकर्ता मोहन और उसके परिवार को भी परेशान किया गया।कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस के पास स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित कोई ठोस जानकारी है, तो वह सीधे उनसे पूछताछ क्यों नहीं करती।उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित उत्पीड़न को स्वीकार नहीं करेगी और जरूरत पड़ने पर राजनीतिक तथा कानूनी रास्ता अपनाएगी।
पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर दिया धरना
गुरुवार को कुमारस्वामी बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और जेडीएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान करने के बजाय पुलिस उनसे सीधे पूछताछ कर सकती है।कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के पास भेजने की बात दोहराई।बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह की ओर से निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिलने के बाद कुमारस्वामी ने अपना धरना समाप्त किया।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का नाम आने से बढ़ा विवाद
कर्नाटक में यह विवाद उस समय बढ़ा, जब पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से संबंधित एक कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो को लेकर चर्चा शुरू हुई।इसके बाद सिद्धारमैया ने अदालत का रुख किया। बेंगलुरु की एक अदालत ने उनके संबंध में कथित अपमानजनक और अप्रमाणित वीडियो सामग्री के प्रसारण तथा प्रकाशन पर अंतरिम रोक लगाई है।वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहले दावा किया था कि उनकी सरकार के मंत्रियों को स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से फंसाने के प्रयास किए गए थे।कुमारस्वामी ने इन दावों की जांच कराने की मांग की है।
गृह मंत्री ने CBI जांच की मांग ठुकराई
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग स्वीकार नहीं की है।उन्होंने कहा कि बेंगलुरु पुलिस मामले की जांच करने में सक्षम है। पुलिस कथित स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।कुमारस्वामी ने गृह मंत्री के रुख पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग भी की है।
कर्नाटक की राजनीति में बढ़ी हलचल
कथित स्टिंग ऑपरेशन, कैबिनेट की जानकारी लीक होने और जेडीएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच अभी जारी है।अब इस मामले में पुलिस जांच के निष्कर्षों पर नजर बनी हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कौन लोग थे और गोपनीय जानकारी लीक होने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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