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उत्तर प्रदेश
बैंक अधिकारी बनकर 85 साल के बुजुर्ग से ₹25.8 लाख की ठगी
Rajeshwari Nishad
17 Oct 2026 1:07 PM IST

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बरेली। सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस कराने के नाम पर साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने बैंक अधिकारी बनकर 85 वर्षीय बुजुर्ग सुदर्शन सहगल को अपने जाल में फंसा लिया। आरोप है कि ठगों ने मोबाइल पर लिंक भेजकर उनसे फॉर्म भरवाया और इसी बहाने बैंक खाते से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद ठगों ने बुजुर्ग की 30 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा दी और ऑनलाइन 27 लाख रुपये का लोन भी कर लिया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद आरोपियों ने 25.79 लाख रुपये की रकम ठग ली।
पीड़ित बुजुर्ग की शिकायत पर साइबर अपराध थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के उन तरीकों को उजागर किया है, जिनमें वे बैंक अधिकारी या बीमा प्रतिनिधि बनकर लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी हासिल करते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस कराने के बहाने बुजुर्ग को बनाया निशाना
जानकारी के अनुसार, 85 वर्षीय सुदर्शन सहगल को सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस कराने के बहाने संपर्क किया गया। आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताया और बीमा से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कराने का भरोसा दिलाया। बुजुर्ग को विश्वास में लेने के बाद मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया।
ठगों ने फॉर्म भरने के नाम पर उनसे जरूरी जानकारियां जुटाईं। साइबर अपराधी अक्सर इसी तरह लोगों को बीमा, बैंकिंग सुविधा, केवाईसी अपडेट या अन्य सेवाओं का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते हैं। कई बार फर्जी लिंक के जरिए पीड़ित से ऐसी जानकारी हासिल कर ली जाती है, जिसका इस्तेमाल बाद में खाते से रकम निकालने या अन्य वित्तीय लेनदेन करने में किया जा सकता है।
इस मामले में भी हेल्थ इंश्योरेंस कराने की प्रक्रिया के बहाने बुजुर्ग की बैंकिंग जानकारी हासिल किए जाने का आरोप है। हालांकि, ठगों ने किस तकनीक का इस्तेमाल किया और बैंकिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए किन जानकारियों का उपयोग किया, इसका विस्तृत खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
30 लाख की एफडी तोड़कर लिया 27 लाख का ऑनलाइन लोन
पीड़ित के साथ हुई ठगी का मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि इसमें केवल बैंक खाते से रकम निकालने तक सीमित रहने के बजाय एफडी और ऑनलाइन लोन का भी इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
शिकायत के मुताबिक, बुजुर्ग की 30 लाख रुपये की एफडी तोड़ दी गई। इसके बाद ऑनलाइन माध्यम से 27 लाख रुपये का लोन भी कराया गया। आरोप है कि साइबर ठगों ने इस पूरी प्रक्रिया के जरिए 25.79 लाख रुपये की रकम अपने कब्जे में ले ली।
इस तरह बुजुर्ग की जमा पूंजी और उनके नाम पर लिए गए कर्ज से जुड़ा मामला सामने आया है। हालांकि, एफडी तोड़ने और लोन स्वीकृत होने की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई, इसके लिए बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि ठगी की रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और उसका आगे कहां इस्तेमाल हुआ। डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है।
शिकायत के बाद साइबर अपराध थाने में प्राथमिकी
घटना के बाद सुदर्शन सहगल ने शिकायत दर्ज कराई। उनके शिकायती पत्र के आधार पर साइबर अपराध थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब मामले की जांच के जरिए ठगी के तरीके, रकम के लेनदेन और आरोपियों की पहचान से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
साइबर ठगी के मामलों में समय महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित को खाते से संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलती है, तो तत्काल बैंक और संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देना उपयोगी हो सकता है। इससे संबंधित खातों में रकम को रोकने या आगे के लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
फिलहाल, इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी, ठगी की रकम की बरामदगी या बैंक की ओर से हुए नुकसान की भरपाई के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे साइबर ठग
साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को हेल्थ इंश्योरेंस, पेंशन, बैंकिंग सुविधा और केवाईसी अपडेट जैसे विषयों के बहाने निशाना बनाया जा सकता है। कई बार ठग भरोसा जीतने के लिए खुद को बैंक अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताते हैं।
ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करने या उसके माध्यम से बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। बीमा या बैंकिंग सेवा से संबंधित किसी भी प्रक्रिया को पूरा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, शाखा या सत्यापित ग्राहक सेवा नंबर से जानकारी लेना बेहतर है।
किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर तत्काल कार्रवाई करने का दबाव बनाए, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय
सुदर्शन सहगल से कथित तौर पर हुई 25.79 लाख रुपये की ठगी यह बताती है कि साइबर अपराधी लोगों की बचत और वित्तीय सुरक्षा को निशाना बनाने के लिए भरोसे का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी नई बीमा योजना या बैंकिंग सुविधा के नाम पर आने वाले फोन और संदेशों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।
फिलहाल, साइबर अपराध थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की जांच जारी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ठगों ने किस तरह बैंकिंग जानकारी हासिल की, एफडी और लोन की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और ठगी की रकम किन खातों में पहुंची।
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