तमिलनाडू

पीड़ितों को जल्द मिलेगा न्याय, CM का बड़ा कदम

Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 4:26 PM IST
पीड़ितों को जल्द मिलेगा न्याय, CM का बड़ा कदम
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चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य में 26 नई विशेष पोक्सो अदालतें स्थापित करने का आदेश जारी किया गया है। इसके लिए सरकार ने 46.59 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई तेज करना और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना है। इसके अलावा राज्य सरकार ने नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए चार अतिरिक्त विशेष अदालतें स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
तमिलनाडु सरकार की ओर से रविवार, 1 नवंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हाल ही में राज्यभर में लंबित पोक्सो मामलों की स्थिति की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति, सुनवाई की प्रगति और अतिरिक्त विशेष अदालतों की आवश्यकता के बारे में विस्तृत जानकारी ली। समीक्षा बैठक में सामने आई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पोक्सो मामलों की सुनवाई के लिए पर्याप्त न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई और समयबद्ध सुनवाई बेहद जरूरी है। सरकार का उद्देश्य पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को जल्द न्याय दिलाने के साथ अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकारी आदेश के मुताबिक, राज्य में कुल 26 नई विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी। इनमें 12 नई विशेष अदालतें और 14 अतिरिक्त विशेष अदालतें शामिल हैं। इन अदालतों के गठन पर 46.59 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। फिलहाल तमिलनाडु में पोक्सो मामलों की सुनवाई के लिए 22 विशेष अदालतें कार्यरत हैं, जबकि चार अन्य अदालतें जल्द शुरू होने की प्रक्रिया में हैं।
नई स्वीकृत अदालतों और पहले से संचालित तथा प्रस्तावित अदालतों को मिलाकर राज्य में पोक्सो मामलों की सुनवाई के लिए कुल 52 विशेष अदालतों की व्यवस्था होगी। ये अदालतें तमिलनाडु के 47 पुलिस जिलों में दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी। सरकार को उम्मीद है कि अदालतों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों का बोझ कम होगा और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
पोक्सो यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न, यौन हमला और यौन शोषण से जुड़े अपराधों के लिए दंड का प्रावधान है। कानून में पीड़ित बच्चों की पहचान गोपनीय रखने और सुनवाई के दौरान उनकी गरिमा तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के विशेष प्रावधान भी शामिल हैं।
पोक्सो कानून के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि संवेदनशील मामलों का निपटारा सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से हो सके। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों को बार-बार अदालत में पेश होने और लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के कारण मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ने से सुनवाई की प्रतीक्षा अवधि कम होने की उम्मीद है।
तमिलनाडु सरकार का मानना है कि लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त अदालतों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद इसी जरूरत के आधार पर नई अदालतों को मंजूरी दी गई है। हालांकि, इन अदालतों में न्यायाधीशों और कर्मचारियों की नियुक्ति तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही इनका संचालन शुरू हो सकेगा।
बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय के साथ निष्पक्ष जांच भी बेहद
महत्वपूर्ण
है। किसी भी मामले में दोष सिद्ध होने के बाद ही अदालत कानून के अनुसार सजा सुनाती है। ऐसे में विशेष अदालतों के गठन के साथ पुलिस जांच, साक्ष्य संकलन और अभियोजन प्रक्रिया को मजबूत करना भी जरूरी होगा।
इस बीच तमिलनाडु सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज यानी एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए चार नई विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश दिया है।
इनमें कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और वेल्लोर में एक-एक नई विशेष अदालत स्थापित की जाएगी। वहीं, चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष अदालत खोली जाएगी। वर्तमान में तमिलनाडु में एनडीपीएस मामलों की सुनवाई के लिए 11 विशेष अदालतें कार्यरत हैं। चार नई अदालतों के गठन से ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का कहना है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी तेज करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाई जा रही है। यह कदम सरकार के 'नशामुक्त तमिलनाडु' अभियान का भी हिस्सा है।
सरकार की इस पहल का असर आने वाले समय में अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई पर दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से पोक्सो मामलों में अलग न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होने से पीड़ित बच्चों को न्याय पाने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, यही सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर 26 पोक्सो और चार एनडीपीएस विशेष अदालतों के गठन का फैसला तमिलनाडु की न्यायिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण विस्तार है। अब इन अदालतों को जल्द संचालित करना, पर्याप्त न्यायिक संसाधन उपलब्ध कराना और लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना सरकार के सामने प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
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