दिल्ली-एनसीआर

NCRTC की बड़ी तैयारी, नमो भारत स्टेशनों के पास विकसित होंगे नए बिजनेस हब

Ratna Netam
1 Nov 2026 4:24 PM IST
NCRTC की बड़ी तैयारी, नमो भारत स्टेशनों के पास विकसित होंगे नए बिजनेस हब
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तेज रफ्तार परिवहन व्यवस्था के साथ शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) नमो भारत कॉरिडोर के आसपास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) आधारित ग्रोथ हब विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य निजी निवेश को आकर्षित करना, परिवहन सुविधाओं के आसपास आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और सुनियोजित शहरी विकास को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के माध्यम से नमो भारत स्टेशनों के आसपास आवासीय, व्यावसायिक और अन्य सुविधाओं को एकीकृत करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।नमो भारत परियोजना को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। यह क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली (RRTS) दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच तेज, सुरक्षित तथा सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है। अब इस परिवहन नेटवर्क के आसपास नए आर्थिक केंद्र विकसित करने की संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक परिवहन में निवेश का लाभ आसपास के शहरी क्षेत्रों को भी मिल सके।
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट एक ऐसी शहरी नियोजन अवधारणा है, जिसके अंतर्गत मेट्रो, रेलवे या अन्य सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों के आसपास आवास, कार्यालय, दुकानें, सार्वजनिक सुविधाएं और पैदल यात्रियों के अनुकूल बुनियादी ढांचा विकसित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और दैनिक जरूरतों को सार्वजनिक परिवहन के नजदीक उपलब्ध कराना है।NCRTC की इस पहल में निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि नमो भारत कॉरिडोर के आसपास व्यावसायिक और आवासीय परियोजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है, तो रियल एस्टेट, खुदरा व्यापार, कार्यालय परिसर, आतिथ्य सेवाओं और अन्य आर्थिक गतिविधियों में निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।
NCRTC ने 27 फरवरी 2026 को दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के आसपास व्यावसायिक और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट की संभावनाओं पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक भी आयोजित की थी। इसमें लगभग 35 प्रमुख संगठनों के करीब 50 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में रियल एस्टेट डेवलपर्स, निवेशकों, व्यावसायिक संगठनों, आतिथ्य क्षेत्र और अन्य संबंधित सेवाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य संभावित विकास परियोजनाओं के लिए निजी क्षेत्र की रुचि और भागीदारी को समझना था।दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 82 किलोमीटर है। यह कॉरिडोर फरवरी 2026 से पूरी तरह परिचालन में है। सरकार की ओर से अगस्त 2026 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद और मेरठ के मास्टर प्लान में ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट क्षेत्र अधिसूचित किए जा चुके हैं। दिल्ली में जंगपुरा और सराय काले खां के लिए भी प्रभाव क्षेत्र योजनाएं तैयार की गई हैं।
NCRTC परिवहन परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किराये से होने वाली आय के अतिरिक्त अन्य राजस्व स्रोतों की संभावनाएं भी तलाश रहा है। इनमें स्टेशनों पर व्यावसायिक स्थानों का उपयोग, विज्ञापन, संपत्ति विकास और भूमि मूल्य में वृद्धि से संबंधित वित्तीय व्यवस्थाएं शामिल हैं। इस प्रक्रिया को वैल्यू कैप्चर फाइनेंसिंग कहा जाता है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं से आसपास की जमीन के मूल्य में होने वाली बढ़ोतरी का एक हिस्सा बुनियादी ढांचे के विकास में लगाने की संभावना पर विचार किया जाता है।इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं उपलब्ध होने से लोगों को रोजमर्रा की यात्रा के लिए निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे सड़क यातायात का दबाव घटाने, ईंधन की खपत कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, प्रस्तावित ग्रोथ हब के विकास में कई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। भूमि उपयोग से संबंधित नियम, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय, निजी निवेशकों की भागीदारी और परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता जैसे विषयों पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक होगा। इसके साथ ही स्थानीय निवासियों की जरूरतों और किफायती आवास की उपलब्धता को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण होगा।NCRTC की योजना का व्यापक उद्देश्य नमो भारत कॉरिडोर को केवल यात्रियों के आवागमन का साधन बनाने के बजाय आर्थिक और शहरी विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। यदि प्रस्तावित योजनाओं को आवश्यक स्वीकृतियां मिलती हैं और निजी क्षेत्र की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो दिल्ली-एनसीआर में रोजगार, व्यापार, आवास और सार्वजनिक परिवहन के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। हालांकि, विशिष्ट ग्रोथ हब के निर्माण की समयसीमा, निवेश राशि और परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप की घोषणा अभी नहीं हुई है।
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