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ऑस्ट्राहिंद 2026 का समापन, भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई जवानों ने दिखाया शौर्य

Ratna Netam
1 Nov 2026 4:14 PM IST
ऑस्ट्राहिंद 2026 का समापन, भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई जवानों ने दिखाया शौर्य
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केरल। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग तथा सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्राहिंद 2026' (AUSTRAHIND 2026) एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। केरल में आयोजित इस अभ्यास का समापन संयुक्त सत्यापन गतिविधियों के साथ हुआ। इस दौरान दोनों देशों के सैन्यकर्मियों ने आपसी समन्वय, सामरिक कौशल, परिचालन तैयारियों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई करने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया।भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे में ऑस्ट्राहिंद जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास न केवल सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का अवसर देते हैं, बल्कि भविष्य में संभावित संयुक्त अभियानों के लिए आवश्यक विश्वास और तालमेल विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संयुक्त सत्यापन अभ्यास का उद्देश्य प्रशिक्षण के दौरान विकसित क्षमताओं और आपसी समन्वय का आकलन करना होता है। इसमें सैनिकों की रणनीतिक समझ, संचार व्यवस्था, नेतृत्व क्षमता और निर्धारित परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की दक्षता को परखा जाता है। इस प्रकार की गतिविधियां वास्तविक सैन्य अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच आयोजित संयुक्त अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों की सैन्य प्रक्रियाओं में पारस्परिक समझ बढ़ाना है। अलग-अलग सैन्य प्रशिक्षण पद्धतियों और परिचालन अनुभवों के बावजूद जब दो देशों के सैनिक एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं, तो उन्हें नई तकनीकों और रणनीतियों को समझने का अवसर मिलता है।
केरल की भौगोलिक परिस्थितियां सैन्य प्रशिक्षण के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां के विविध भूभाग और मौसम की परिस्थितियां सैनिकों को चुनौतीपूर्ण वातावरण में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में संयुक्त अभ्यास सैनिकों की शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और सामूहिक निर्णय लेने की दक्षता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग केवल संयुक्त अभ्यास तक सीमित नहीं है। दोनों देश रक्षा संवाद, समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
इस वर्ष ऑस्ट्राहिंद का पांचवां संस्करण 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक तिरुवनंतपुरम स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित किया गया। इसमें भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना के लगभग 120-120 जवानों ने हिस्सा लिया। भारतीय दल में गढ़वाल राइफल्स के जवानों के साथ अन्य सैन्य इकाइयों के कर्मी शामिल थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व उसकी 13वीं ब्रिगेड ने किया।अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण चरण 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित 36 घंटे का संयुक्त सत्यापन अभियान रहा। इसमें दोनों देशों के सैनिकों ने जंगल, द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में विभिन्न सैन्य गतिविधियों को अंजाम दिया। समुद्र और हवाई मार्ग से सैनिकों की तैनाती, समुद्र तट पर सुरक्षित नियंत्रण स्थापित करना तथा बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा जैसे अभियानों का अभ्यास किया गया।
इसके अतिरिक्त आतंकवाद विरोधी अभियान, विद्रोह से निपटने की रणनीतियां, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रियाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं।इस संयुक्त अभ्यास की विशेषता विभिन्न सैन्य और नागरिक एजेंसियों की भागीदारी रही। भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह प्राधिकरण और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं ने भी सहयोग किया। इससे आपात परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
अभ्यास के अंतिम सत्यापन चरण का अवलोकन ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल की दूसरी डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल मैट बर, भारतीय सेना की 54 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल कपिल राणा और भारत एवं ऑस्ट्रेलिया में न्यूजीलैंड के रक्षा अताशे कमोडोर एजे डाउलिंग ने किया।इस बार न्यूजीलैंड के पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी भी विशेष आकर्षण रही। ऑस्ट्राहिंद अभ्यास में न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने पहली बार पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया। इससे क्षेत्रीय रक्षा सहयोग और सैन्य अनुभवों के आदान-प्रदान को नया आयाम मिला।ऑस्ट्राहिंद सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसका आयोजन भारत और ऑस्ट्रेलिया में बारी-बारी से किया जाता है। चौथा संस्करण 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ स्थित इरविन बैरक्स में आयोजित किया गया था। इस वर्ष अभ्यास का केंद्र तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में संयुक्त सैन्य कार्रवाई रहा।
रक्षा सहयोग के दृष्टिकोण से इस अभ्यास को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसी चुनौतियों को देखते हुए भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य तालमेल का महत्व लगातार बढ़ रहा है।ऑस्ट्राहिंद 2026 के सफल समापन ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, परिचालन तैयारियों और संयुक्त कार्रवाई की क्षमताओं को मजबूत करने का संदेश दिया है। यह अभ्यास भविष्य में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के साझा प्रयासों को भी प्रोत्साहित करेगा।
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