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Bikaner: देश-दुनिया के पर्यटकों का पसंदीदा उत्सव—अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव—इस वर्ष 9 से 11 जनवरी के बीच भव्य स्तर पर आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर शुक्रवार देर शाम जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने कलेक्ट्रेट सभागार में विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ उत्सव की रूपरेखा साझा की गई। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ ने बताया कि 2 जनवरी को सुबह 8:30 बजे लक्ष्मीनाथजी मंदिर से पीले चावल बांटकर शहरवासियों को औपचारिक आमंत्रण दिया जाएगा, जिसमें रोबीले युवक और सजाए गए ऊंट शहर के प्रमुख मार्गों पर शोभायात्रा निकालेंगे।
9 जनवरी: परंपरा और कला के रंगों से होगी शुरुआत
राठौड़ ने जानकारी दी कि 9 जनवरी को सुबह 8 से 10 बजे तक “हमारी विरासत” हेरिटेज वॉक आयोजित होगी, जो लक्ष्मीनाथजी मंदिर से शुरू होकर बड़ा बाजार, मोहता चौक, हनुमान मंदिर और असानिया चौक होते हुए प्रसिद्ध रामपुरिया हवेलियों तक पहुंचेगी। इसके बाद राजस्थान राज्य अभिलेखागार में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक “राजस्थान के रंग—बीकाणा के संग” प्रदर्शनी लगेगी, जिसमें पिछवई, उस्ता और मथेरण जैसी दुर्लभ कलाओं का प्रदर्शन और 7 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक रवीन्द्र रंगमंच के ओपन थिएटर में “बीकाणा की आवाज़—वॉयस ऑफ बीकानेर” कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
दूसरे दिन 10 जनवरी को सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC) में “ऊंटां रो मेलो” होगा। इसमें ऊंट नृत्य, फर कटिंग, सजावट प्रतियोगिता, ऊंट दौड़ और घुड़दौड़ जैसी रोमांचक प्रतियोगिताएं शामिल रहेंगी। पहली बार भीतरी शहर में धरणीधर स्टेडियम में दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक “बीकाणा की शान” कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण शो, ढोला-मारू प्रदर्शन और पारंपरिक राजस्थानी परिधानों की प्रतियोगिता होगी। सांस्कृतिक शाम का आयोजन डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में रात 7 से 10 बजे तक “स्वरम” के रूप में होगा, जहां लोक नृत्य और गायन की प्रस्तुति होगी। राज्य अभिलेखागार की ओर से ऊंटों के इतिहास पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी भी आगंतुकों को आकर्षित करेगी।
महोत्सव का अंतिम दिन 11 जनवरी रायसर के रेतीले धोरों पर मनाया जाएगा। सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक “दम-खम” के तहत रस्साकशी, कुश्ती, कबड्डी, पगड़ी बांधना, मटका दौड़ और देशी-विदेशी पर्यटकों की धोरों पर रेस जैसे देसी खेल आयोजित होंगे। इसके बाद दोपहर 1:30 से शाम 6:30 बजे तक “उड़ान” कार्यक्रम के तहत सैंड आर्ट, हैंडीक्राफ्ट और फूड मार्केट, कैमल और ऊंटगाड़ी सफारी, भारतीय संस्कृति के अनुसार विदेशी जोड़े की प्रतीकात्मक शादी जैसे अनोखे आयोजन होंगे। शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक “कला संगम” के साथ महोत्सव का समापन होगा, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, अग्नि नृत्य, सेलिब्रिटी नाइट और आकर्षक आतिशबाजी से पूरा माहौल उत्सवमय हो जाएगा।
समीक्षा बैठक में निगम उपायुक्त यशपाल आहूजा, बीडीए उपायुक्त ऋषि सुधांशु पांडे, ट्रैफिक सीओ किसन सिंह, राज्य अभिलेखागार के डॉ. नितिन गोयल, संग्रहालय प्रतिनिधि राकेश शर्मा, पशुपालन संयुक्त निदेशक डॉ. बिरमाराम, NRCC से दिनेश मुंजाल और डॉ. मित्तुल सुंवडिया, पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक महेश व्यास सहित कई होटल व्यवसायियों व पर्यटन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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