राजस्थान

BSL फैक्ट्री में मजदूर की मौत, परिजनों ने किया जमकर हंगामा, प्रबंधन के खिलाफ की नारेबाजी

Gulabi Jagat
22 Nov 2025 11:58 PM IST
BSL फैक्ट्री में मजदूर की मौत, परिजनों ने किया जमकर हंगामा, प्रबंधन के खिलाफ की नारेबाजी
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भीलवाडा। जिले के हमीरगढ़ थानान्तर्गत चित्तौड़गढ़ रोड स्थित बीएसएल फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर की शुक्रवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही शनिवार सुबह फैक्ट्री गेट पर अन्य मजदूर साथी जमा हो गए और जमकर हंगामा किया। परिजनों व फैक्ट्री श्रमिकों ने प्रबंधन पर बिना सूचना दिए अस्पताल में भर्ती कराने का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद सहमति बनी और प्रदर्शन खत्म हुआ। जानकारी के अनुसार खैराबाद निवासी छोटूलाल पुत्र जगा सालवी पिछले लगभग 20 सालों से बीएसएल फैक्ट्री में लोडिंग-अनलोडिंग काम करता था। शुक्रवार शाम ड्यूटी के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। अन्य श्रमिकों ने उसे भीलवाड़ा जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। आज सुबह मृतक के परिजन, फैक्ट्री मजदूर और ग्रामीण बड़ी संख्या में फैक्ट्री गेट पर एकत्रित हो गए। परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और उचित मुआवजे की मांग की। मौके पर हमीरगढ़ थाना पुलिस पहुंची और परिजनों से बातचीत कर माहौल शांत करवाने का प्रयास किया।


आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने शुरुआती 3 घंटों तक परिजनों से वार्ता नहीं की। इससे गुस्साए लोग उग्र होने लगे। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को नियंत्रण में किया और वार्ता की शुरू करवाई। पुलिस की मध्यस्थता में फैक्ट्री प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच लगभग एक घंटे तक सुलह वार्ता चलीं। प्रबंधन ने मृतक की पत्नी व तीन बच्चों (दो लड़के, एक लड़की) को आर्थिक सहायता के रूप में 14 लाख रुपए देने और छोटूलाल की सैलरी की आधी राशि पेंशन के रूप में नियमित देने पर सहमति जताई। इसके बाद परिजनों ने धरना समाप्त किया। साथ ही प्रदर्शनकारी मजदूर फिर से काम पर लौट गए। शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। साथ ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। वही छोटू की अचानक मौत से खैराबाद व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन मौत की स्थिति स्पष्ट करने व कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रबंधों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं इस मामले ने फैक्ट्रियों में कार्यरत मजदूरो की सुरक्षा व प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है।
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