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BRICS हेल्थ मीट में टीबी और डिजिटल हेल्थ पर चर्चा

Saba Naaz
23 July 2026 2:40 PM IST
BRICS हेल्थ मीट में टीबी और डिजिटल हेल्थ पर चर्चा
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में आयोजित 16वीं BRICS स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक का समापन हो गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में BRICS के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों एवं प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक चली इस बैठक में वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों, नई तकनीकों, डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बैठक के समापन अवसर पर कहा कि इस बार भारत BRICS स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। उन्होंने कहा कि बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े नौ प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इन चर्चाओं का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों से मिलकर निपटने की रणनीति तैयार करना था।

बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दों में टीबी रिसर्च नेटवर्क को मजबूत करना, डिजिटल हेल्थ सिस्टम को आगे बढ़ाना और पारंपरिक एवं समेकित चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना शामिल रहा। स्वास्थ्य मंत्रियों और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान केवल आपसी सहयोग और तकनीकी साझेदारी से ही संभव है।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि चंडीगढ़ में हुई इस बैठक से BRICS देशों और साझेदार देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि बैठक में हुए विचार-विमर्श से आने वाले समय में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिसर्च और नई तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में देशों के बीच अनुभवों और संसाधनों का आदान-प्रदान बेहद जरूरी है। BRICS मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पारंपरिक चिकित्सा के लिए बनेगा वर्किंग ग्रुप

बैठक के दौरान पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि BRICS देशों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई है।

उन्होंने कहा कि भारत की आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक पद्धतियां हजारों वर्षों पुरानी हैं और आज पूरी दुनिया में इनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। भारत अपनी इस विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा केवल भारत की पहचान नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए स्वास्थ्य समाधान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 से 12 वर्षों में आयुष उत्पादों के निर्यात में करीब 10 गुना वृद्धि हुई है।

उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ हुए वैश्विक कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जिसमें 127 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस दौरान कई देशों ने आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी भारतीय पद्धतियों को अपनाने में रुचि दिखाई थी।

डिजिटल हेल्थ और रिसर्च पर जोर

BRICS स्वास्थ्य बैठक में डिजिटल हेल्थ को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने और स्वास्थ्य डेटा के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया।

इसके अलावा टीबी जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ रिसर्च और सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों ने टीबी नियंत्रण के लिए नई रणनीतियों, शोध और उपचार सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।

बैठक के अंत में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों का कहना है कि BRICS स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक से वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा मिलेगी और सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

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